October 28, 2026

आरएसएस में अब 9 क्षेत्र, 46 प्रांतों की जगह बनेंगे करीब 90 संभाग

इंदौर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) अपने संगठनात्मक ढांचे में बड़े बदलाव की तैयारी कर रहा है। प्रस्तावित व्यवस्था में संघ के 11 क्षेत्र घटाकर 9 किए जाएंगे, जबकि मौजूदा 46 प्रांतों की जगह करीब 90 संभाग बनाए जाएंगे। इसके अलावा पहली बार राज्य स्तर पर संगठनात्मक इकाइयां बनाने की योजना है। इनमें राज्य प्रचारक और राज्य कार्यवाह होंगे, लेकिन राज्य संघचालक का पद नहीं रहेगा। बदलावों का उद्देश्य संगठन के कामकाज को विकेंद्रीकृत करना, जिम्मेदारियों का बेहतर बंटवारा और विभिन्न स्तरों के बीच तालमेल मजबूत करना है।

संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की वार्षिक बैठक 2 से 4 नवंबर तक मध्यप्रदेश के इंदौर में होगी। तीन दिवसीय बैठक में संगठन के पुनर्गठन, शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की समीक्षा और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा होगी। बैठक में संघ प्रमुख मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले, सभी छह सह-सरकार्यवाह, अखिल भारतीय विभागों के प्रमुख और कार्यकारी मंडल के सदस्य शामिल होंगे।

हर तीन साल में होगी प्रतिनिधि सभा की बैठक

संघ की सबसे बड़ी निर्णय लेने वाली संस्था अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक अब हर साल के बजाय हर तीन साल में नागपुर में आयोजित करने का प्रस्ताव है। वहीं, क्षेत्रीय स्तर की बैठकें हर दो साल में होंगी। नई व्यवस्था में संगठन के विभिन्न स्तरों के बीच समन्वय बढ़ाने पर जोर रहेगा। अधिक संभाग बनने से स्थानीय स्तर पर गतिविधियों की निगरानी और कार्यक्रमों के संचालन में सुविधा मिलने की उम्मीद है। इन बदलावों के लागू होने पर संघ की प्रशासनिक व्यवस्था में व्यापक पुनर्गठन होगा।

इंदौर बैठक में शताब्दी वर्ष की गतिविधियों पर चर्चा

आरएसएस की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक 2 से 4 नवंबर तक इंदौर में होगी। इसमें शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की समीक्षा के साथ संगठनात्मक बदलावों पर विचार किया जाएगा। बैठक में मोहन भागवत और दत्तात्रेय होसबाले के अलावा सभी छह सह-सरकार्यवाह शामिल होंगे। संघ के अखिल भारतीय विभागों के प्रमुख और कार्यकारी मंडल के सदस्य भी हिस्सा लेंगे। बैठक में संगठन की भावी कार्ययोजना और समसामयिक राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय विषयों पर चर्चा होने की संभावना है।