नई दिल्ली: नीट (NEET) परीक्षा धांधली मामले में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का आंदोलन अब एक नए और निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के 26 दिनों से चले आ रहे आमरण अनशन के समापन के बाद अब ध्यान केंद्र सरकार और सीजेपी के बीच आयोजित होने वाली उच्चस्तरीय बातचीत पर टिक गया है। जंतर-मंतर पर डटे प्रदर्शनकारियों के बीच संगठन ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बिना आंदोलन समाप्त नहीं होगा।
कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में सरकार और सीजेपी की वार्ता
सोनम वांगचुक का अनशन समाप्त कराने के बाद केंद्र सरकार अब आंदोलनकारी संगठन से सीधा संवाद स्थापित करने जा रही है। कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया (CCI) में दोपहर 12:30 बजे एक महत्वपूर्ण बैठक तय की गई है, जिसमें सीजेपी का एक प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा और केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात करेगा। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके और प्रतिनिधि आशुतोष रंका ने बताया कि यद्यपि यह वार्ता किसी तटस्थ स्थान पर हो रही है, लेकिन उनकी पहली और सबसे प्रमुख शर्त शिक्षा मंत्री का पद छोड़ना ही रहेगी।
लिखित गारंटी मिलने पर समाप्त हुआ 26 दिवसीय अनशन
26 दिनों तक चले कठिन अनशन के बाद सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया के माध्यम से "भूख हड़ताल खत्म, जवाबदेही की शुरुआत!" का संदेश जारी किया। उन्होंने जानकारी दी कि विभिन्न राजनीतिक दलों के 65 सांसदों के समर्थन और संसद में परीक्षा प्रणाली पर व्यापक चर्चा कराने के लिखित आश्वासन के बाद ही उन्होंने अपना उपवास खोला है। वांगचुक के अनुसार, सरकार के साथ दो दिनों तक चली मैराथन वार्ताओं के बाद जब उन्हें लिखित पत्र प्राप्त हो गया, तब जाकर उन्होंने अनशन खत्म करने का फैसला किया।
जंतर-मंतर पर सख्त पहरा और संचार सेवाएं बाधित
सोनम वांगचुक के अनशन टूटने से मिली राहत के बीच जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन का सिलसिला थमा नहीं है। शांति व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी अनहोनी से निपटने के लिए जंतर-मंतर तथा आसपास के इलाकों में शुक्रवार को भी मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद रखी गई हैं। राजधानी के कई संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किया गया है, जबकि सीजेपी ने साफ कहा है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक धरना जारी रहेगा।

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