September 9, 2026

एग्रो-प्रोसेसिंग क्लस्टर्स की विस्तृत मैपिंग के साथ निर्यात एवं निवेश संभावनाएं चिन्हित करें—मुख्य सचिव

जयपुर। मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास ने प्रदेश में कृषि उपज को प्रसंस्करण, बाजार और निर्यात से बेहतर ढंग से जोड़ते हुए किसानों को उनकी उपज का अधिक मूल्य दिलाने पर जोर दिया। उन्होंने प्रस्तावित एग्रो-प्रोसेसिंग क्लस्टर्स की फसल एवं क्षेत्रवार विस्तृत मैपिंग कर उनकी आर्थिक, निवेश और निर्यात संभावनाओं को चिन्हित करने तथा इसके आधार पर ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव बुधवार को शासन सचिवालय में एग्रो-प्रोसेसिंग क्लस्टर्स के विकास को लेकर आयोजित हितधारकों की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि क्लस्टर्स को केवल उत्पादन और प्रसंस्करण तक सीमित न रखते हुए खेत से बाजार तक पूरी मूल्य श्रृंखला को मजबूत किया जाए। इसके लिए छंटाई एवं श्रेणीकरण, पैकेजिंग, शीत भंडारण, प्रसंस्करण, परिवहन एवं आपूर्ति व्यवस्था, ब्रांड निर्माण और बाजार से जुड़ाव की सुविधाएं विकसित की जाएं, जिससे फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान में कमी आए और किसानों को बेहतर बाजार एवं बेहतर मूल्य मिल सके।

श्री श्रीनिवास ने नाबार्ड को प्रस्तावित क्लस्टर्स की आर्थिक संभावनाओं की किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) मैपिंग करने तथा संबंधित विभागों को आगामी समीक्षा में क्लस्टरवार विस्तृत एवं क्रियान्वयन योग्य कार्ययोजना प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने नव उद्यमों, सूक्ष्म प्रसंस्करण इकाइयों और निजी क्षेत्र को इस पहल से जोड़ने के साथ केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के बेहतर समन्वय से उपलब्ध संसाधनों और सहायता का अधिकतम लाभ लेने पर जोर दिया। अतिरिक्त मुख्य सचिव, उद्योग श्री शिखर अग्रवाल ने प्रदेश में बड़े कृषि प्रसंस्करण उद्यमों को आकर्षित करने के साथ कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन और निर्यात की संभावनाओं पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने प्रमुख निर्यात योग्य कृषि उत्पादों और उनके संभावित बाजारों को चिन्हित करने तथा एग्रो-प्रोसेसिंग क्लस्टर्स को फूड पार्कों एवं राज्य की औद्योगिक और निवेश प्रोत्साहन नीतियों से जोड़ने पर जोर दिया। इससे निजी निवेश को प्रोत्साहन मिलने के साथ राजस्थान के कृषि उत्पादों की राष्ट्रीय और वैश्विक बाजारों तक पहुंच बढ़ सकेगी।

प्रमुख शासन सचिव, कृषि एवं उद्यानिकी श्रीमती मंजू राजपाल ने बताया कि राजस्थान फूड पार्क डेवलपमेंट पॉलिसी-2026 के तहत प्रदेश में 39 फूड पार्क प्रस्तावित हैं, जिनमें 35 स्थानों पर भूमि आवंटित की जा चुकी है। वर्तमान में प्रदेश में 2 मेगा फूड पार्क, 4 एग्रो-प्रोसेसिंग क्लस्टर्स तथा 6 आरआईआईसीओ/स्पाइस पार्क सहित कृषि प्रसंस्करण से जुड़ा आधारभूत ढांचा उपलब्ध है। इसके साथ ही 1,500 से अधिक एग्रो-प्रोसेसिंग इकाइयां तथा प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन (पीएमएफएमई) योजना के तहत समर्थित 1,850 से अधिक सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां हैं। उन्होंने बताया कि मूंग, सरसों, सोयाबीन, किन्नू, अनार, अमरूद, संतरा, इसबगोल, जीरा और लहसुन पर आधारित 10 एग्रो-प्रोसेसिंग क्लस्टर्स विकसित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इनके लिए प्रमुख उत्पादन क्षेत्रों की फसल एवं जिलेवार मैपिंग की गई है, ताकि उत्पादन वाले क्षेत्रों को प्रसंस्करण सुविधाओं और बाजार से प्रभावी रूप से जोड़ा जा सके। उद्यानिकी आयुक्त श्रीमती श्वेता चौहान ने बताया कि प्रस्तावित 10 क्लस्टर्स में से 7 राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के क्लस्टर विकास कार्यक्रम (सीडीपी 2.0) के तहत पात्र हैं। इनमें अमरूद, अनार एवं जीरा के तीन क्लस्टर्स के अवधारणा प्रस्ताव प्रस्तुत किए जा चुके हैं, जबकि इसबगोल, किन्नू, लहसुन एवं संतरा के चार क्लस्टर्स को आगामी चरण में प्रस्तावित किया जाना है। सरसों, सोयाबीन एवं मूंग के क्लस्टर्स को फूड पार्क, निवेश समझौतों एवं राज्य सरकार की योजनाओं के माध्यम से आगे बढ़ाने पर कार्य किया जा रहा है।

बैठक में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार, उद्योग एवं वाणिज्य, वित्त, कृषि एवं उद्यानिकी विभाग, राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड, राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड, नाबार्ड, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के विभिन्न संस्थानों, चौधरी चरण सिंह राष्ट्रीय कृषि विपणन संस्थान तथा प्रदेश के कृषि विश्वविद्यालयों के अधिकारियों एवं विशेषज्ञों , कृषि  प्रसंस्करण  से  जुड़े निवेशक एवं प्रगतिशील कृषकों  ने भाग लिया।