बेंगलुरु | कर्नाटक पब्लिक सर्विस कमीशन (KPSC) द्वारा आयोजित वेटरनरी ऑफिसर्स (पशु चिकित्सा अधिकारियों) की भर्ती परीक्षा में बड़े पैमाने पर धांधली और प्रश्न-पत्र लीक करने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जाँच में खुलासा हुआ है कि राजपत्रित अधिकारी बनने के इस इम्तिहान में प्रश्न-पत्रों को मोटी रिश्वत लेकर बेचा गया था। प्रत्येक उम्मीदवार से प्रश्न-पत्र उपलब्ध कराने के एवज में 80 लाख रुपये की माँग की गई थी, जो बाद में मोलभाव के बाद 30 से 40 लाख रुपये में तय हुआ। इस पूरी साजिश का सबसे हैरान करने वाला पहलू यह रहा कि एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी ने स्वयं परीक्षा के स्ट्रांग रूम की 'चाबी' पेपर लीक करने वाले मुख्य सरगना को सौंप दी थी। जिन अभ्यर्थियों ने इसके लिए पैसे चुकाए थे, उन्हें परीक्षा वाले दिन विशेष गाड़ियों में बैठाकर सुरक्षित तरीके से परीक्षा केंद्रों तक पहुँचाया गया था।
ईडी की जाँच और बसवराज कन्नाले की गिरफ्तारी
प्रवर्तन निदेशालय का बेंगलुरु जोनल ऑफिस, KPSC द्वारा कुल 400 पदों पर वेटरनरी ऑफिसर्स की भर्ती के लिए आयोजित परीक्षा में हुई भारी अनियमितताओं की गहन जाँच कर रहा है। यह पूरी जाँच बेंगलुरु के विधान सौधा पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई कई प्राथमिकियों (FIRs) के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है। इन मामलों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत अपराध दर्ज किए गए हैं।
जाँच के दौरान ED के हाथ ऐसे पुख्ता सबूत लगे हैं जिनसे साबित होता है कि मुख्य आरोपी बसवराज कन्नाले ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर अवैध रूप से पैसे वसूले और उम्मीदवारों को सही उत्तरों वाला लीक प्रश्न-पत्र मुहैया कराकर उनका चयन सुनिश्चित किया। इसी आधार पर बसवराज कन्नाले को 17 सितंबर को गिरफ्तार कर लिया गया था, जिन्हें अदालत ने 14 दिनों की ईडी हिरासत में भेजा था।
लाखों रुपयों की डील और एडवांस भुगतान के तरीके
जाँच में यह बात सामने आई कि बसवराज कन्नाले को गोपनीय प्रश्न-पत्रों तक सीधी पहुँच KPSC के तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक एवं आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार के साथ अपनी गहरी नजदीकिय़ों के कारण मिली थी। गंगवार के पास ही परीक्षा की गोपनीय सामग्री की कस्टडी और सुरक्षा की मुख्य जिम्मेदारी थी।
कन्नाले ने कई योग्य उम्मीदवारों की पहचान कर उनसे संपर्क किया और चयन का भरोसा दिलाया। प्रत्येक उम्मीदवार से शुरुआत में 80 लाख रुपये माँगे गए थे, जो बाद में 30 से 40 लाख रुपये में तय हुए। इस अवैध रकम का कुछ हिस्सा नकद (कैश) तथा कुछ बैंकिंग चैनलों के माध्यम से एडवांस के तौर पर लिया गया। इसके अतिरिक्त, शेष राशि की गारंटी के रूप में कई उम्मीदवारों से बिना रकम भरे हुए हस्ताक्षर किए हुए चेक और प्रॉमिसरी नोट भी जब्त किए गए हैं, जिन्हें तलाशी के दौरान बरामद किया गया।
रिसॉर्ट में रुकवाकर उत्तर रटवाने की साजिश
जाँच से यह भी खुलासा हुआ है कि अवैध रिश्वत की इस रकम को ठिकाने लगाने के लिए 'ओम लक्ष्मी सौहार्द सहकारी संघ नियमित, बीदर' के बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया। चयनित उम्मीदवारों को बेंगलुरु के बाहरी इलाके में स्थित एक गुप्त रिसॉर्ट में ले जाया गया, जहाँ उन्हें लीक हुआ प्रश्न-पत्र और उसके सही उत्तर उपलब्ध कराए गए। बसवराज कन्नाले और उसके साथियों की कड़ी देखरेख में उम्मीदवारों को वे उत्तर रटवाए गए। इसके अगले दिन, यानी परीक्षा तिथि पर, कन्नाले द्वारा प्रबंधित विशेष वाहनों से उन अभ्यर्थियों को उनके निर्धारित परीक्षा केंद्रों तक ले जाया गया।
आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार की संलिप्तता और गिरफ्तारी
इस घोटाले में तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक और आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार की भूमिका बेहद संदिग्ध पाई गई। उन्हें परीक्षाओं के निष्पक्ष और पारदर्शी संचालन, प्रश्न-पत्रों की छपाई की निगरानी और गोपनीय सामग्री की सुरक्षा का जिम्मा सौंपा गया था। किंतु उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अवैध रिश्वत के बदले परीक्षा से ठीक एक दिन पहले बसवराज कन्नाले को प्रश्न-पत्र लीक करने में पूरी मदद की।
गंगवार को 18 सितंबर को औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर पीएमएलए (PMLA) मामलों की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें भी 14 दिन की ईडी कस्टडी में भेजा गया। जाँच में यह भी पता चला कि इस अवैध कमाई को छिपाने और उसे वैध (सफेद) दिखाने के लिए बैंक ट्रांसफर, सोने के आभूषणों की खरीद, तथा हवाई यात्राओं के नकद भुगतान जैसे विभिन्न माध्यमों से काले धन को ठिकाने लगाया गया था।

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