बंगलूरू। कर्नाटक में गन्ने के समर्थन मूल्य को लेकर किसानों और चीनी मिल प्रबंधकों के बीच जारी गतिरोध अब समाप्ति की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के नेतृत्व में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक के दौरान दोनों पक्ष इस महत्वपूर्ण फार्मूले पर सहमत हुए हैं कि केंद्र सरकार द्वारा चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) तय किए जाने के पश्चात ही गन्ने की अंतिम दरें निर्धारित की जाएंगी। राज्य के गन्ना उत्पादक किसान वर्तमान में प्रति टन 6,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि दिए जाने की मांग पर अड़े हुए हैं। इस वार्ता को लंबे समय से चले आ रहे आंदोलन का सर्वसम्मति से समाधान निकालने की दिशा में एक बेहद सकारात्मक कदम माना जा रहा है।
दो दिनों में अंतिम निर्णय की जानकारी देंगे किसान और मिल मालिक
बैठक के उपरांत जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, किसान संगठनों और चीनी मिल मालिकों ने इस नए प्रस्ताव पर आपस में विस्तृत विचार-विमर्श करने हेतु दो दिनों का अतिरिक्त समय मांगा है। उम्मीद जताई जा रही है कि दोनों पक्ष अपनी आंतरिक चर्चाओं के बाद सरकार को अपने अंतिम निर्णय से अवगत करा देंगे। सरकार का मानना है कि इस मध्यस्थता से गतिरोध समाप्त होगा और पेराई सत्र सुचारू रूप से शुरू हो सकेगा।
किसानों की आजीविका की रक्षा के लिए सरकार प्रतिबद्ध
उपमुख्यमंत्री शिवकुमार ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य में किसानों और चीनी मिलों दोनों का सुचारू संचालन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अन्नदाताओं की आजीविका की सुरक्षा करना राज्य शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सरकार पूरी तरह किसानों के हितों के साथ खड़ी है और उनकी जायज मांगों को लेकर केंद्र सरकार के समक्ष मजबूती से पक्ष रखने के लिए तैयार है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि किसान और मिल मालिक समझौते के बेहद करीब पहुंच चुके हैं तथा केंद्र सरकार भी इस दिशा में सकारात्मक रुख अपनाएगी।
सुवर्ण विधान सौधा और सर्किट हाउस में 10 घंटे तक चला बैठकों का दौर
इस पेचीदा मुद्दे का समाधान खोजने के लिए बेलगावी के सुवर्ण विधान सौधा और सर्किट हाउस में सुबह 11 बजे से लेकर देर रात तक करीब दस घंटे तक मैराथन वार्ताओं का दौर चला। कुल पांच अलग-अलग चरणों में आयोजित इन बैठकों में उपमुख्यमंत्री ने स्वयं उपस्थित रहकर दोनों पक्षों के मध्य सहमति बनाने का प्रयास किया। इस उच्चस्तरीय वार्ता में राज्य सरकार के नौ कैबिनेट मंत्री, लगभग 70 विधायक, राज्य की 80 में से 79 चीनी मिलों के अधिकृत प्रतिनिधि तथा प्रमुख किसान नेता उपस्थित रहे।
अब केंद्र सरकार के फैसले और आगामी दो दिनों की चर्चा पर टिकी निगाहें
फिलहाल गन्ने की अंतिम कीमतों को लेकर निर्णय होना शेष है। किसान प्रति टन छह हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि की मांग दोहरा रहे हैं, वहीं मिल मालिक केंद्र द्वारा शक्कर की न्यूनतम दर घोषित होने के बाद ही किसानों के भुगतान पर अंतिम निर्णय लेने की बात कह रहे हैं। आगामी दो दिनों में होने वाली बैठकों से यह स्पष्ट हो जाएगा कि दोनों पक्ष इस नए फार्मूले को पूरी तरह स्वीकार करते हैं या नहीं।

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