जबलपुर। नर्मदा नदी और उसके आसपास के तटीय इलाकों में धड़ल्ले से चल रहे अवैध रेत उत्खनन और मछलियों के शिकार पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की खंडपीठ ने इस गंभीर मामले पर संज्ञान लेते हुए मछुआरा कल्याण एवं मत्स्य विकास विभाग सहित कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, ईओडब्ल्यू और जिला खनन अधिकारी को नोटिस जारी कर इस पूरी अव्यवस्था पर जवाब तलब किया है।
राज्य की गौरव महाशीर मछली के अस्तित्व पर गहराया संकट
जबलपुर के स्थानीय निवासी अभिषेक कुमार सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका के माध्यम से कोर्ट को सूचित किया गया कि नर्मदा और खिरहनी घाट पर बड़े पैमाने पर रेत का अवैध खनन हो रहा है और वहां की अनमोल महाशीर मछली का लगातार शिकार किया जा रहा है। याचिकाकर्ता के वकील अंशुमान सिंह ने अदालत में दलील पेश की कि जिस महाशीर को प्रदेश सरकार ने राज्य मछली का विशेष दर्जा दे रखा है, उसे प्रशासनिक लापरवाही के कारण खिरहनी घाट के पास खुलेआम और अवैध तरीके से निशाना बनाया जा रहा है।
प्रजनन काल के दौरान बेखौफ शिकार से विलुप्ति की कगार पर प्रजाति
अदालत को सौंपी गई जानकारियों के अनुसार, महाशीर मछली के प्रजनन काल के संवेदनशील समय में भी शिकारी बेखौफ होकर इसका आखेट कर रहे हैं, जबकि इस अवधि में शिकार पर पूर्ण प्रतिबंध होना अनिवार्य है। एक वन्यजीव रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया गया कि लगातार हो रहे इस अवैध शिकार के चलते महाशीर प्रजाति अब पूरी तरह विलुप्त होने की कगार पर पहुंच चुकी है और सरकारी स्तर पर संरक्षण के दावों के बावजूद नदी से रेत की अवैध निकासी और अवैध शिकार ने इसके अस्तित्व को भारी खतरे में डाल दिया है।
सरकारी दर्जे के बाद भी प्रशासनिक उदासीनता पर कोर्ट की सख्त नजर
याचिका में इस बात पर भी गहरा असंतोष जताया गया कि साल 2011 में प्रदेश सरकार द्वारा महाशीर को राज्य मछली घोषित किए जाने के बावजूद जमीनी स्तर पर इसकी सुरक्षा के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए, बल्कि अधिकारियों की अनदेखी के चलते शिकारियों के हौसले और बुलंद हो गए। नर्मदा नदी के पर्यावरण और इसकी जैव विविधता को हो रहे इस बड़े नुकसान पर हाईकोर्ट की यह हालिया सख्ती पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है, जो इस दुर्लभ जलीय जीव को बचाने में एक निर्णायक भूमिका निभाएगी।

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