गांधीनगर: गुजरात के संग्रहालय (म्यूजियम) इन दिनों अपनी ऐतिहासिक धरोहरों और आधुनिक टेक्नोलॉजी के अनूठे संगम के लिए दुनिया भर में सुर्खियां बटोर रहे हैं। राज्य सरकार द्वारा पारंपरिक कलाकृतियों को सहेजने के साथ-साथ उनमें अत्याधुनिक डिजिटल तकनीक का समावेश करने की रणनीति बेहद सफल साबित हुई है। इस अनूठे बदलाव का नतीजा यह रहा है कि पिछले दो वर्षों में 16 लाख से अधिक देशी-विदेशी पर्यटकों ने गुजरात के इन आधुनिक संग्रहालयों का दीदार किया है। नई पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास से जोड़ने की यह मुहिम अब एक बड़े पर्यटन अभियान में बदल चुकी है।
तकनीक से जीवंत हो उठा 2500 साल पुराना इतिहास
गुजरात के वडनगर में बना नया पुरातत्व संग्रहालय (आर्कियोलोजिकल म्युजियम) इस बदलाव का सबसे बेहतरीन उदाहरण है। यहाँ आने वाले पर्यटकों को केवल कांच के बक्से में बंद पुरानी चीजें नहीं दिखाई जातीं, बल्कि आधुनिक तकनीक जैसे ऑगमेंटेड रियलिटी (AR), वर्चुअल रियलिटी (VR) और 3D डिस्प्ले की मदद से इतिहास को उनके सामने जीवंत कर दिया जाता है। इस तकनीक के जरिए लोग 2500 साल पुरानी सभ्यता और उसके सात अलग-अलग सांस्कृतिक चरणों के विकास को बहुत करीब से महसूस कर पाते हैं।
लोथल में आकार ले रहा है दुनिया का सबसे बड़ा समुद्री संग्रहालय
सिंधु घाटी सभ्यता के प्रमुख बंदरगाह शहर लोथल में 'नेशनल मैरिटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स' का निर्माण किया जा रहा है, जो विश्व का सबसे बड़ा समुद्री संग्रहालय होगा। इस कॉम्प्लेक्स को 400 एकड़ से अधिक क्षेत्र में विकसित किया जा रहा है। यहाँ आने वाले पर्यटकों को प्राचीन भारत की नौकायन कला, व्यापारिक ताकत और हजारों साल पुराने बंदरगाह शहर की वास्तविक झलक देने के लिए इमर्सिव गैलरी और वर्चुअल प्रेजेंटेशन जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
इतिहास और अध्यात्म का डिजिटल संगम
हाल ही में गांधीनगर के कोबा तीर्थ में 'सम्राट संप्रति संग्रहालय' की शुरुआत की गई है, जो जैन धर्म की समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को समर्पित है। इस संग्रहालय को कुल सात अलग-अलग हिस्सों में बांटा गया है, जहां भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को पारंपरिक कलाकृतियों के साथ-साथ डिजिटल और ऑडियो-विजुअल माध्यमों से बेहद रोचक ढंग से पेश किया गया है। इसके अलावा केवडिया में 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' के पास बना अत्याधुनिक संग्रहालय भी पर्यटकों के आकर्षण का बड़ा केंद्र है, जो सरदार वल्लभभाई पटेल के जीवन और रियासतों के विलीनीकरण के इतिहास को शानदार डिजिटल तकनीक के जरिए दिखाता है।
'विकास भी, विरासत भी' के मंत्र से बढ़ा पर्यटन
संग्रहालयों के इस कायाकल्प ने गुजरात के पर्यटन उद्योग को नई रफ्तार दी है। अब लोग केवल सैर-सपाटे या मनोरंजन के लिए ही नहीं, बल्कि ज्ञान और संस्कृति को करीब से समझने के लिए इन जगहों पर पहुंच रहे हैं। तकनीक की मदद से पुराने इतिहास को आज के नजरिए से प्रस्तुत करने की इस कोशिश ने युवाओं के मन में अपनी विरासत के प्रति गौरव का भाव पैदा किया है, जिससे राज्य में सांस्कृतिक पर्यटन का एक नया अध्याय शुरू हुआ है।

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