August 12, 2026

दादा को बचाने के लिए गिड़गिड़ाता रहा पोता, आवारा कुत्तों की घटना से गांव में मचा हड़कंप

मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के जानीखुर्द थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले किठौली गांव से एक बेहद दर्दनाक और रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई है, जहां आवारा कुत्तों के एक खूंखार झुंड ने पोते के सामने ही उसके 58 वर्षीय दादा को नोच-नोचकर मौत के घाट उतार दिया। इस हृदयविदारक हादसे के बाद पूरे इलाके में मातम पसर गया है और ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, किठौली गांव निवासी किसान लख्मी (पुत्र रामशरण) मंगलवार की सुबह करीब आठ बजे हाथ में दरांती लेकर खेत पर ईख (गन्ना) बांधने के लिए घर से निकले थे। घर से निकलते वक्त उनके बेटे जितेंद्र ने उन्हें आवाज देकर कहा था कि उनका पोता ईशांत 10 बजे तक कांवड़ लेकर घर लौट आएगा। तब लख्मी ने मुस्कुराते हुए कहा था कि वे बस एक बीघे ईख की बंधाई का काम निपटाकर दोपहर तक घर वापस लौट आएंगे। हालांकि, किसी को यह अंदेशा नहीं था कि खेत का वह हरा-भरा कोना उनके जीवन का आखिरी पड़ाव साबित होगा।

पोते की आंखों के सामने हुआ खौफनाक मंजर

दोपहर के करीब दो बजे तक जब लख्मी घर वापस नहीं लौटे, तो परिजनों को चिंता सताने लगी। कांवड़ लेकर घर आ चुके उनके पोते ईशांत ने कहा कि वह धूप में थक गए होंगे और खाना भी ठंडा हो रहा है, इसलिए वह खुद जाकर दादाजी को बुला लाता है।

ईशांत दौड़ते हुए खेत की मेड़ पर पहुंचा और दूर से ही दादा को आवाज लगाई। कोई जवाब न मिलने पर जब वह पास पहुंचा, तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। वहां कुत्तों का एक आक्रामक झुंड मौजूद था और वे उसके दादा के बेजान शरीर पर टूट पड़े थे। यह भयानक दृश्य देखकर 14 वर्षीय मासूम ईशांत की चीख निकल गई। वह बदहवास होकर उल्टे पांव भागा और कांपते हुए शब्दों में बस यही चिल्लाता रहा कि "दादाजी को बचा लो… कुत्ते दादा को खा रहे हैं…"।

ग्रामीणों के पहुंचने पर भागे कुत्ते, मची चीख-पुकार

ईशांत की चीख-पुकार सुनकर परिजन और ग्रामीण तुरंत लाठी-डंडे लेकर खेत की ओर दौड़े। लोगों को आते देख कुत्ते वहां से भाग निकले, लेकिन तब तक किसान लख्मी की सांसें थम चुकी थीं। जिस मिट्टी पर लख्मी ने जिंदगीभर खून-पसीना बहाकर अपने परिवार का पालन-पोषण किया था, वही मिट्टी उनके खून से लाल हो चुकी थी।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस तुरंत मौके पर पहुंच गई, लेकिन गुस्साए ग्रामीणों ने प्रशासनिक व्यवस्था के खिलाफ रोष जताते हुए करीब एक घंटे तक शव को वहां से उठने नहीं दिया। पुलिस अधिकारियों और स्थानीय लोगों के समझाने-बुझाने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा सका। जब पुलिस लख्मी के क्षत-विक्षत शव को ले जाने लगी, तो उनके दोनों बेटों— अंकुर और जितेंद्र— का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। वे बार-बार अपने पिता के उस चेहरे को छूने की कोशिश कर रहे थे, जिसे कुत्तों ने बुरी तरह नोच डाला था।

पहले भी हो चुके हैं ऐसे खौफनाक हादसे

ग्रामीणों ने बताया कि क्षेत्र में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। इससे पहले भी कई बार इस तरह के दर्दनाक हादसे हो चुके हैं:

  • करीब 10 महीने पहले शामली निवासी एक 6 साल के बच्चे को भी कुत्तों ने नोचकर मार डाला था।

  • महज एक महीने पहले किठौली गांव की ही रहने वाली महिला विमला और भरतोई को कुत्तों ने बुरी तरह काटकर गंभीर रूप से घायल कर दिया था।

  • एक साल पहले पास के ही गांव सिसौला में सूरजमुखी नामक महिला को कुत्तों ने काटकर मौत के घाट उतार दिया था।

ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार प्रशासनिक अधिकारियों और विभागों से शिकायत करने के बावजूद इन हिंसक और लावारिस कुत्तों को पकड़ने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिसके कारण आज एक और मासूम की जान चली गई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्राधिकारी (CO) सरधना आशुतोष कुमार ने बताया कि शव का पंचनामा भरकर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। इसके साथ ही, वन विभाग को भी इस घटना की आधिकारिक रूप से जानकारी दे दी गई है, ताकि क्षेत्र में घूम रहे लावारिस और खतरनाक कुत्तों को पकड़ने की उचित योजना जल्द से जल्द क्रियान्वित की जा सके। इस दुखद हादसे के बाद से मृतक के परिवार में कोहराम मचा हुआ है।