September 15, 2026

इमिग्रेशन को चकमा देकर म्यूनिख पहुंचे 3 इतालवी, एअर इंडिया से सरकार ने मांगा जवाब

नयी दिल्ली। देश के सबसे व्यस्त इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (IGI) हवाई अड्डे पर सुरक्षा और आव्रजन (इमिग्रेशन) प्रक्रिया में एक बड़ी चूक का मामला सामने आया है। अमृतसर से दिल्ली पहुंचे तीन इतालवी नागरिक बिना किसी अनिवार्य इमिग्रेशन क्लीयरेंस के ही म्यूनिख जाने वाली अंतरराष्ट्रीय उड़ान में बैठकर देश से बाहर चले गए। इस संवेदनशील सुरक्षा चूक पर कड़ा रुख अपनाते हुए नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एयर इंडिया को कारण बताओ नोटिस जारी कर सात दिनों के भीतर विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है।

दिल्ली एयरपोर्ट पर कैसे हुई सुरक्षा चूक?

यह घटना 4 सितंबर 2026 की देर रात की है। तीन इतालवी नागरिक—सुरजीत सिंह, बलविंदर कौर और गुरदेव सिंह—अमृतसर से एयर इंडिया की डोमेस्टिक फ्लाइट (AI-1115) के जरिए रात करीब 12:50 बजे दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचे। इनके पास केवल घरेलू यात्रा के लिए 'D' इंडिकेटर वाले बोर्डिंग पास थे और इन्हें लुफ्थांसा की उड़ान (LH-763) से म्यूनिख जाना था।

नियमों के मुताबिक, घरेलू उड़ान से आने वाले ऐसे यात्रियों को गेट नंबर 39 से बाहर निकलकर अंतरराष्ट्रीय प्रस्थान क्षेत्र में जाना था और अनिवार्य इमिग्रेशन जांच पूरी करनी थी। लेकिन, चूक के चलते इन्हें सीधे 'इंटरनेशनल-टू-इंटरनेशनल' (I-to-I) ट्रांसफर एरिया में भेज दिया गया, जो केवल उन यात्रियों के लिए होता है जिनका इमिग्रेशन पहले ही पूरा हो चुका हो। इसके बाद ये बिना किसी जांच के म्यूनिख की उड़ान में सवार हो गए।

नागरिक उड्डयन मंत्रालय के तीखे सवाल

मंत्रालय द्वारा जारी नोटिस में एयर इंडिया के यात्री प्रबंधन और ग्राउंड चेकिंग प्रणाली पर कई अहम सवाल उठाए गए हैं:

  • 'D' इंडिकेटर वाले घरेलू यात्रियों को 'I-to-I' ट्रांसफर एरिया में प्रवेश की अनुमति क्यों दी गई?

  • हब एयरपोर्ट पर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को अलग रखने के नियमों का पालन क्यों नहीं हुआ?

  • यात्रियों को निकास द्वार से निकालकर इमिग्रेशन काउंटर भेजने के बजाय सीधे I-to-I रूट से क्यों ले जाया गया?

  • अमृतसर (स्पोक एयरपोर्ट) पर ही लुफ्थांसा की आगे की अंतरराष्ट्रीय उड़ान का बोर्डिंग पास क्यों जारी किया गया, जबकि नियमों में इसकी अनुमति नहीं है?

  • अमृतसर और दिल्ली में यात्रियों को एस्कॉर्ट करने वाले एयर इंडिया और एआई-सैट्स (AI-SATS) के ग्राउंड स्टाफ की क्या भूमिका थी?