सोने की कंपनी में ‘कागजी खेल’: सेबी ने उजागर किया राजेश एक्सपोर्ट्स का कथित रेवेन्यू घोटाला, एलआईसी के निवेश पर बढ़ा संकट

 नई दिल्ली | भारतीय शेयर बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने देश की जानी-मानी आभूषण निर्माता कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (REL) और उसके चेयरमैन व प्रबंध निदेशक राजेश मेहता के खिलाफ एक बड़ा अंतरिम एकतरफा आदेश जारी किया है। नियामक ने कंपनी पर वित्त वर्ष 2021 से 2025 के दौरान करीब 15.15 लाख करोड़ रुपये के राजस्व (रेवेन्यू) को फर्जी तरीके से बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने और पैसों की हेराफेरी करने के बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि, कंपनी ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है, लेकिन इस सनसनीखेज खबर के बाहर आते ही कंपनी के शेयरों में भारी बिकवाली देखी जा रही है।

राजस्व में अभूतपूर्व हेराफेरी का सनसनीखेज खुलासा

सेबी के पूर्णकालिक सदस्य कमलेश चंद्र वार्ष्णेय द्वारा जारी 109 पन्नों के अंतरिम आदेश के अनुसार, राजेश एक्सपोर्ट्स ने पिछले कुछ वर्षों में बड़े पैमाने पर गैर-वास्तविक लेनदेन किए और संदिग्ध अकाउंटिंग के जरिए प्रमोटर समूह की कंपनियों में फंड ट्रांसफर किया। सेबी की जांच में दावा किया गया है कि वित्त वर्ष 2021 से 2025 के बीच दिखाया गया 15.15 लाख करोड़ रुपये का राजस्व पूरी तरह फर्जी था, जो कि इस अवधि के दौरान कंपनी द्वारा रिपोर्ट किए गए कुल राजस्व का लगभग 99.8% बैठता है। इतनी बड़ी वित्तीय गड़बड़ी को देखते हुए सेबी ने मुख्य निर्णयकर्ता राजेश मेहता पर अगले आदेश तक शेयर बाजार में किसी भी तरह की प्रतिभूतियों की खरीद-बिक्री या ट्रेडिंग करने पर पूरी तरह रोक लगा दी है।

ऑडिटर्स का असहयोग और निवेशकों व एलआईसी को झटका

इस पूरे मामले में कंपनी के वैधानिक ऑडिटर्स की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। सेबी के मुताबिक, बार-बार समन भेजने के बावजूद न तो कंपनी ने पैसों के लेन-देन से जुड़े सही दस्तावेज पेश किए और न ही ऑडिटर्स ने जांच में सहयोग करते हुए वर्किंग पेपर उपलब्ध कराए। इस खुलासे का सीधा असर शेयर बाजार पर पड़ा, जिससे राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयर 5% तक टूट गए। इस गिरावट का बड़ा नुकसान भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) को भी उठाना पड़ा है, जिसकी इस कंपनी में 10.80% की बड़ी हिस्सेदारी है। इस वजह से एलआईसी के शेयरों में भी 1% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।

1,200 रुपये से शुरू हुआ सफर और कंपनी का पक्ष

महज 1,200 रुपये उधार लेकर चांदी के कारोबार से शुरुआत करने वाले 60 वर्षीय राजेश मेहता ने साल 2015 में स्विस रिफाइनरी 'वालकैम्बी' का $400 मिलियन में अधिग्रहण कर वैश्विक पहचान बनाई थी। इस बड़े विवाद पर अपनी सफाई देते हुए राजेश एक्सपोर्ट्स ने कहा है कि सेबी का यह आदेश केवल अंतरिम है और इसमें कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला गया है। कंपनी का दावा है कि उनके द्वारा घोषित राजस्व पूरी तरह सही है और इसमें कोई हेराफेरी नहीं की गई है। कंपनी के मुताबिक, यह स्थिति केवल सेबी और उनके बीच संवाद की कमी व भ्रम के कारण पैदा हुई है, जिसे वे जल्द ही सभी जरूरी दस्तावेज जमा करके स्पष्ट कर देंगे। फिलहाल कॉरपोरेट जगत की नजरें अब सेबी की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।