August 31, 2026

‘रात में भी तुरंत दवा मिलना बड़ी सुविधा’, भारत के हेल्थकेयर सिस्टम की तारीफ में क्या बोलीं पूर्व डॉक्टर?

नई दिल्ली | ब्रिटेन (यूके) की नेशनल हेल्थ सर्विस (एनएचएस) में अपनी सेवाएं दे चुकी एक पूर्व डॉक्टर ने भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था और यहां सुगमता से मिलने वाली चिकित्सीय सुविधाओं की खुलकर प्रशंसा की है। उन्होंने रात के समय भी बिना किसी परेशानी के तुरंत दवाइयां और इंजेक्शन मिलने के अपने हालिया निजी अनुभव को सोशल मीडिया पर साझा करते हुए इसे किसी वरदान से कम नहीं बताया है।

रात 10 बजे अचानक बिगड़ी पति की तबीयत

वायरल हुए इस वीडियो में डॉ. दीपांजलि शर्मा ने बताया कि एक दिन रात के करीब 10 बज रहे थे, जब उनके पति, जो पेशे से खुद एक डॉक्टर हैं, अचानक गंभीर रूप से अस्वस्थ हो गए। शाम के वक्त हल्के सिरदर्द से शुरू हुई यह समस्या रात तक काफी बढ़ गई थी। पति की बिगड़ती हालत को देखकर डॉ. दीपांजलि तुरंत जरूरी दवाइयां और आईवी (इंट्रावीनस) इंजेक्शन लाने के लिए रात के वक्त ही गाड़ी लेकर बाहर निकल पड़ीं। उन्होंने कहा कि आपातकाल की उस कठिन घड़ी में उन्हें भारत में मिलने वाली चिकित्सा सुविधाओं की असली अहमियत का अहसास हुआ।

पश्चिमी देशों की तुलना में भारत की व्यवस्था बेहतर

डॉ. शर्मा ने अपने वीडियो में ब्रिटेन और अन्य पश्चिमी देशों की स्वास्थ्य प्रणालियों से भारत की तुलना करते हुए कहा कि यदि वे इस स्थिति में किसी विदेशी देश में होतीं, तो एक डॉक्टर होने के बावजूद उन्हें दवाओं और उपचार के लिए लंबी-लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता। उन्होंने स्पष्ट किया कि वहां की ओवर-लोडेड इमरजेंसी यूनिट्स में तत्काल सहायता मिलना बेहद कठिन होता है, और न ही वहां मेडिकल स्टोर के काउंटर से सीधे डॉक्टर की सलाह पर इस तरह दवाइयां आसानी से खरीदी जा सकती हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि विदेशों में जीवन भले ही दूर से बहुत सुंदर और आसान दिखाई देता हो, लेकिन वहां रोजमर्रा की जिंदगी में कई बड़े संघर्ष छिपे होते हैं। जिन छोटी-छोटी सुविधाओं को हम भारत में सामान्य मानकर अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं, वे वहां बड़े संघर्ष का कारण बन जाती हैं।

'व्यवस्था में कमियां हैं, लेकिन खूबियों को न भूलें'

डॉ. दीपांजलि ने ईमानदारी से यह स्वीकार किया कि भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था और अन्य सार्वजनिक क्षेत्रों में अभी भी कई स्तरों पर सुधार की काफी गुंजाइश है, लेकिन इसका यह कतई मतलब नहीं है कि हम अपनी व्यवस्था की अच्छाइयों और खूबियों को पूरी तरह भूल जाएं। उन्होंने कहा कि दुनिया का कोई भी देश हर परिस्थिति में शत-प्रतिशत आदर्श नहीं हो सकता। एक भारतीय नागरिक के रूप में संकट के समय इस तरह की त्वरित और सुलभ चिकित्सा सुविधा का लाभ उठा पाना उनके लिए बेहद सौभाग्य की बात है।