नई दिल्ली। मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है, हौसलों से उड़ान होती है। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक माविक टाक ने साबित कर दिया है कि अड़चनें और आर्थिक तंगी इंसान के बुलंद हौसलों को नहीं डिगा सकतीं। तमाम मुश्किलों को पार करते हुए उन्होंने भारतीय पुलिस सेवा में मुकाम हासिल किया है और सोनभद्र में इस पद को संभालने वाली वह पहली महिला अधिकारी बनी हैं।
संघर्षों से भरा शुरुआती जीवन और शिक्षा
माविक टाक का जन्म राजस्थान के पाली जिले के फालना में हुआ था। बेहतर अवसरों की तलाश में उनका परिवार मुंबई चला गया, जहां उन्हें और उनके परिवार को कठिन आर्थिक दौर से गुजरना पड़ा। पिता की आय सीमित होने के कारण एक ऐसा समय भी आया जब ट्यूशन फीस न भर पाने के कारण माविक और उनकी बहन को एक साल तक स्कूल से दूर रहना पड़ा। समाज की तमाम आलोचनाओं के बावजूद उनके पिता ने अपनी तीनों बेटियों को उच्च शिक्षित करने का दृढ़ संकल्प लिया। मुंबई से अपनी शुरुआती और उच्च शिक्षा पूरी करते हुए माविक ने पॉलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन और लैंग्वेज पॉलिटिक्स में पोस्ट ग्रेजुएशन किया, जिससे उन्हें सिविल सेवा की तैयारी के लिए एक मजबूत शैक्षणिक आधार मिला।
बिना कोचिंग के यूपीएससी में सफलता
उन्होंने अपनी मेहनत और लगन के बल पर बिना किसी कोचिंग संस्थान की मदद लिए खुद ही सिविल सेवा की तैयारी करने का निर्णय लिया। शुरुआती दो प्रयासों में असफलता मिलने के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपनी कमजोरियों पर लगातार काम किया। आखिरकार, वर्ष 2021 की यूपीएससी परीक्षा में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 386 हासिल कर सफलता का परचम लहराया और भारतीय पुलिस सेवा के लिए चुनी गईं।
सोनभद्र में इतिहास रचने वाली तैनाती
वर्ष 2022 बैच की उत्तर प्रदेश कैडर की अधिकारी माविक टाक ने सोनभद्र से पहले बांदा जिले में साइबर और क्राइम सेल जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। इसके बाद उन्हें सोनभद्र में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के रूप में तैनात किया गया। उनके इस पद पर आने से जिले में एक नया इतिहास बना है क्योंकि वह यहां इस जिम्मेदारी को संभालने वाली पहली महिला आईपीएस अधिकारी हैं। उनके परिवार का संघर्ष और उनकी यह सफलता आज के युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन चुकी है।

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