वनरक्षक-जेल प्रहरी परीक्षा रद्द, अभ्यर्थियों ने 5 किमी पैदल मार्च कर कलेक्ट्रेट घेरा

सतना। मध्य प्रदेश के सतना जिले में आयोजित वनरक्षक, जेल प्रहरी और क्षेत्र रक्षक संयुक्त भर्ती परीक्षा के दौरान उस समय अचानक भारी हंगामा और विवाद की स्थिति बन गई, जब दूसरी पाली (शिफ्ट) की परीक्षा अपने तय समय पर शुरू नहीं हो सकी। परीक्षा केंद्र के प्रबंधन द्वारा वहां मौजूद अभ्यर्थियों को अचानक यह सूचना दी गई कि कुछ गंभीर तकनीकी खराबी और सर्वर ठप होने की वजह से इस पाली की परीक्षा को तत्काल प्रभाव से स्थगित किया जा रहा है। जैसे ही यह खबर परीक्षा देने आए युवाओं को मिली, उनका सब्र का बांध टूट गया और छात्रों के बीच प्रशासनिक अव्यवस्था को लेकर भारी आक्रोश फैल गया।

दूर-दराज से आए अभ्यर्थियों को झेलनी पड़ी भारी परेशानी

यह पूरा मामला महादेवा-शेरगंज इलाके में स्थित आदित्य इंजीनियरिंग कॉलेज परीक्षा केंद्र का है, जहां परीक्षा देने के लिए सैकड़ों की संख्या में छात्र पहुंचे थे। इस अचानक आए फैसले से अभ्यर्थी बेहद परेशान और हताश नजर आए। प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने बताया कि वे मध्य प्रदेश के अलग-अलग और दूरस्थ जिलों से रात-रात भर का लंबा सफर तय करके और भारी किराया खर्च करके सतना पहुंचे थे। कई छात्र तो परीक्षा के एक दिन पहले ही शहर आ गए थे ताकि समय पर केंद्र पहुंच सकें। ऐसे में ऐन वक्त पर परीक्षा रद्द होने से उन्हें न केवल गहरे मानसिक तनाव से गुजरना पड़ा, बल्कि उनका आर्थिक नुकसान भी हुआ।

पैदल मार्च कर कलेक्ट्रेट पहुंचे भड़के छात्र

तकनीकी कारणों से परीक्षा निरस्त किए जाने के बाद गुस्साए अभ्यर्थियों ने पहले तो परीक्षा केंद्र परिसर के बाहर ही अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। इसके बाद भी जब उनकी बात नहीं सुनी गई, तो बड़ी संख्या में छात्र एकजुट हुए और परीक्षा केंद्र से निकलकर शहर की सड़कों पर लगभग 5 किलोमीटर लंबा पैदल मार्च करते हुए सीधे कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंच गए। कलेक्ट्रेट के मुख्य द्वार पर पहुंचकर आक्रोशित अभ्यर्थियों ने धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया और सरकार व परीक्षा कराने वाले प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री के नाम एक प्रशासनिक ज्ञापन सौंपकर अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त की।

बार-बार सर्वर फेल होने और तकनीकी गड़बड़ियों पर उठे सवाल

प्रदर्शन में शामिल युवाओं ने राज्य की ऑनलाइन परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। छात्रों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान मध्य प्रदेश की विभिन्न सरकारी भर्ती परीक्षाओं में तकनीकी समस्याएं, सर्वर फेल होना और अंतिम समय पर परीक्षाएं स्थगित होना एक आम बात बन चुकी है। इस तरह की बार-बार होने वाली लापरवाहियों से प्रतियोगी परीक्षाओं की दिन-रात लगन से तैयारी कर रहे प्रदेश के ईमानदार युवाओं का भरोसा पूरी तरह से डगमगा रहा है। अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों के पास कोई मजबूत तकनीकी बैकअप सिस्टम क्यों नहीं होता, जिसका खामियाजा गरीब छात्रों को भुगतना पड़ता है।

मजदूरी कर परीक्षा देने आए छात्रों का छलका दर्द, प्रशासन ने दिया आश्वासन

कलेक्ट्रेट के सामने प्रदर्शन के दौरान कई अभ्यर्थियों ने अपनी व्यक्तिगत और पारिवारिक परेशानियां भी रोते हुए साझा कीं। डिंडोरी जिले के शाहपुरा से आए अभ्यर्थी धर्मेंद्र कुमार द्विवेदी ने बताया कि वह बेहद गरीब परिवार से हैं और मजदूरी व अन्य छोटे-मोटे काम करके किसी तरह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए पैसे जुटाते हैं। परीक्षा रद्द होने से उनके पैसे तो बर्बाद हुए ही, साथ ही उनकी मेहनत और रोजगार के दिन का भी नुकसान हो गया।

मामले की गंभीरता और बढ़ते बवाल को देखते हुए एसडीएम राहुल सिलादिया सहित भारी पुलिस बल और प्रशासनिक टीम तुरंत मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारी छात्रों से संवेदनशीलता के साथ बातचीत की, उनकी सभी शिकायतों को सुना और मुख्यमंत्री के नाम दिया गया उनका ज्ञापन स्वीकार किया। प्रशासनिक अधिकारियों ने छात्रों को आश्वस्त किया है कि उनकी मांगों और इस पूरी अव्यवस्था की रिपोर्ट को संबंधित उच्च विभाग तक तुरंत भेजा जाएगा। फिलहाल, आक्रोशित छात्र जल्द से जल्द नई परीक्षा तिथि घोषित करने और पूरी भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता व तकनीकी मजबूती लाने की मांग कर रहे हैं।