नई दिल्ली: दिल्ली के हौजरानी, विवेक विहार और पालम जैसे इलाकों में हाल ही में हुए भीषण अग्निकांडों ने पूरी राजधानी को झकझोर कर रख दिया है। इन हादसों में कई मासूमों की जान चली गई, जिसके बाद दिल्ली अग्निशमन विभाग (Delhi Fire Service) की लेती-लतीफी और संसाधनों की भारी कमी पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस संकट, इसके पीछे की वजहों और सरकारी दावों पर दिल्ली के गृह व ऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने स्थिति साफ करते हुए विभाग के आधुनिकीकरण का पूरा खाका सामने रखा है।
आखिर क्यों सुलग रही है दिल्ली? बदलती लाइफस्टाइल और लापरवाही जिम्मेदार
गृह मंत्री के अनुसार, यह कहना गलत होगा कि पहले के मुकाबले आग की घटनाएं अचानक बढ़ गई हैं, लेकिन आज की जीवनशैली और निर्माण के तरीकों ने जोखिम को बहुत ज्यादा बढ़ा दिया है।
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ग्लास फेसाड और ज्वलनशील चीजें: आजकल इमारतों को बाहर से पूरी तरह शीशे (Glass) से बंद कर दिया जाता है और अंदर अत्यधिक ज्वलनशील सजावटी सामान का इस्तेमाल होता है। आग लगने पर ये इमारतें 'गैस चैंबर' बन जाती हैं।
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एसी (AC) और ओवरलोडिंग: घरों और दुकानों में स्वीकृत बिजली लोड से ज्यादा उपकरणों का इस्तेमाल हो रहा है। खासकर एसी में इस्तेमाल होने वाली गैस बेहद ज्वलनशील होती है, जिससे शॉर्ट सर्किट के बाद धमाके हो रहे हैं।
तंग गलियां और अतिक्रमण: फायर ब्रिगेड के रास्ते का सबसे बड़ा रोड़ा
हादसों के वक्त दमकल की गाड़ियां समय पर क्यों नहीं पहुंच पातीं? इस पर सरकार का मानना है कि दिल्ली की बेतहाशा आबादी, सड़कों पर बढ़ता ट्रैफिक, सालों से हुआ अवैध निर्माण और संकरी गलियों में फैला अतिक्रमण सबसे बड़ी बाधा हैं। कई बार चाहकर भी दमकलकर्मी समय पर मौके पर नहीं पहुंच पाते।
अवैध व्यावसायिक इकाइयां बनीं टाइम बम: हौजरानी और पालम जैसे रिहायशी इलाकों और अनधिकृत कॉलोनियों (Unauthorized Colonies) में अवैध रूप से चल रहे कारखाने और दुकानें इन हादसों की मुख्य वजह हैं। मिक्स्ड लैंड यूज (मिश्रित भूमि उपयोग) के कारण रिहायशी घरों के बीच चल रही इन अवैध फैक्ट्रियों की पहचान करना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है।
1969 की पुरानी तकनीक के भरोसे चल रहा था विभाग, अब यूरोप से आएंगी मशीनें
दिल्ली अग्निशमन विभाग की सबसे बड़ी कमी इसकी पुरानी पड़ चुकी तकनीक है। विभाग आज भी 1969 की संचार प्रणाली (Communication System) पर काम कर रहा है। साल 2011 में केंद्र सरकार द्वारा दिए गए अपग्रेडेशन के सुझावों पर पिछली सरकारों ने ध्यान नहीं दिया।
स्थिति को सुधारने के लिए सरकार अब निम्नलिखित बड़े कदम उठा रही है:
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यूरोप से आएंगी ब्रोंटो मशीनें: ऊंचाई पर आग बुझाने के लिए यूरोप से दो आधुनिक हाइड्रोलिक प्लेटफार्म (ब्रोंटो मशीनें) खरीदी जा रही हैं। अभी विभाग के पास सिर्फ एक ऐसी पुरानी मशीन है।
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संकरी गलियों के लिए मिनी गाड़ियां: तंग रास्तों के लिए 100 क्विक रिस्पांस व्हीकल (QRV) खरीदे जा रहे हैं, जिनमें से 50 आ चुके हैं। इसके अलावा फायर फाइटिंग मोटरसाइकिलों का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है।
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8 नए फायर स्टेशन: दिल्ली में 8 नए अग्निशमन केंद्र बनाने के लिए जमीन आवंटित कर दी गई है और बजट का प्रावधान भी हो चुका है। इन्हें अगले 1 से 1.5 साल में तैयार कर लिया जाएगा।
दिल्ली का होगा 'फायर ऑडिट', 400 भवनों को नोटिस जारी
अवैध और असुरक्षित इमारतों पर नकेल कसने के लिए पूरी दिल्ली की व्यावसायिक इकाइयों का चरणबद्ध तरीके से फायर ऑडिट कराया जा रहा है। इसके लिए जल्द ही टेंडर जारी किए जाएंगे। फिलहाल, कोचिंग सेंटरों की जांच के लिए एक विशेष कमेटी बनाई गई है जो 3 महीने में रिपोर्ट देगी।
अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई शुरू हो चुकी है। सभी जिलों में जिलाधिकारियों (DM) के नेतृत्व में बनी कमेटियों ने अब तक 400 से अधिक भवनों को अग्नि सुरक्षा मानकों की कमी पाए जाने पर नोटिस थमाया है। विभागों के बीच तालमेल की कमी को दूर करने के लिए अब उपराज्यपाल ने गृह विभाग को नोडल एजेंसी बनाया है, जो हर महीने इस बात की समीक्षा करेगी कि सुरक्षा नियमों का उल्लंघन कहां-कहां हो रहा है।

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