लखनऊ। उत्तर प्रदेश के सरकारी विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों में शिक्षा ग्रहण कर रही करीब 50 हजार छात्राओं को 'रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना' का लाभ देने की प्रशासनिक तैयारियां तेज हो गई हैं। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा तैयार किए गए नए प्रस्ताव के मुताबिक, इस योजना का लाभ उन मेधावी छात्राओं को दिया जाएगा, जिनके परिवार की वार्षिक आय 10 से 12 लाख रुपये से कम होगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े रुख के बाद विभाग ने इस दिशा में तेजी से काम करना शुरू कर दिया है। इसके तहत सभी राज्य विश्वविद्यालयों से स्नातक (ग्रेजुएशन) प्रथम वर्ष में 80, 85 और 90 प्रतिशत से अधिक अंक अर्जित करने वाली छात्राओं का पूरा विवरण जुटाया गया है।
उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि स्कूटी वितरण को पारदर्शी बनाने के लिए विस्तृत नियमावली तैयार की जा रही है। उन्होंने साफ किया कि स्नातक पहले वर्ष में 80 फीसदी या उससे अधिक अंक लाने वाली छात्राएं ही इस रेस में शामिल हो सकेंगी। साथ ही, मध्यम और जरूरतमंद परिवारों की मदद के लिए सालाना 10 से 12 लाख रुपये की आय सीमा का भी नियम जोड़ा जा रहा है। कैबिनेट मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि छात्राओं को इस योजना के तहत पेट्रोल से संचालित होने वाली स्कूटी प्रदान की जाएगी।
प्रदेश के 75 प्रतिशत कॉलेजों में छात्र पहन रहे यूनिफॉर्म
राजधानी लखनऊ में उच्च शिक्षा संस्थानों में ड्रेस कोड (यूनिफॉर्म) लागू करने के सवाल पर उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि शासन स्तर पर इसका पूरा डाटा मंगवाकर गहन अध्ययन किया जा रहा है। शुरुआती समीक्षा में सामने आया है कि सूबे के लगभग 75 फीसदी महाविद्यालयों में छात्र-छात्राएं पहले से ही निर्धारित यूनिफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि हालांकि अभी तक इसके लिए कोई औपचारिक शासनादेश जारी नहीं किया गया है, लेकिन शेष बचे कॉलेजों के लिए भी जल्द ही आधिकारिक गाइडलाइन जारी की जाएगी। सरकार का मानना है कि परिसरों में अनुशासन और समानता बनाए रखने के लिए यूनिफॉर्म बेहद उपयोगी और आवश्यक है।

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