नई दिल्ली
भारत के लिए अच्छी खबर आई है। देश में अब महा गरीबी (Extreme Poverty) आधिकारिक तौर पर खत्म हो चुकी है। अमेरिकी थिंक टैंक ब्रुकिंग्स ने अपनी हालिया रिपोर्ट में ये बात कही है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में गरीबी लगातार कम हो रही है। देश अब महा गरीबी से पूरी तरह बाहर निकल चुका है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह सरकार की मजबूत नीति का परिणाम है, जिससे पिछले दशक में भारत में अच्छा विकास हुआ है। भारत ने हाल ही में 2022-23 के लिए अपना आधिकारिक उपभोग व्यय डेटा (Consumption Expenditure Data) जारी किया है।
इन आंकड़ों से पिछले 10 वर्षों में भारत की गरीबी को लेकर अनुमान मिलता है। आंकड़ों के मुताबिक, साल 2011-12 के मुकाबले वर्ष 2022-23 में प्रति व्यक्ति घरेलू मासिक खर्च दोगुने से ज्यादा हो गया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत के लिए अब समय आ गया है कि वह अन्य देशों की तरह गरीबी की उच्च रेखा अपनाए। गरीबी की उच्च रेखा अपनाने से सरकार को सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों को फिर से परिभाषित करने का मौका मिलेगा, ताकि जरूरतमंद लोगों की बेहतर पहचान हो सके और उन्हें अधिक सहायता प्रदान की जा सके।
क्या कहते हैं आंकड़े
आंकड़ों में शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में असमानता में बड़ी गिरावट भी देखी गई है। शहरी गिनी इंडेक्स 36.7 से घटकर 31.9 हो गया और ग्रामीण गिनी इंडेक्स 28.7 से घटकर 27.0 हो गया। गिनी इंडेक्स को आमतौर पर आर्थिक असमानता के पैमाने के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है, जो एक जनसंख्या के बीच आय या संपत्ति के वितरण को मापता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि उच्च विकास दर और असमानता में भारी गिरावट के कारण भारत ने महा गरीबी को खत्म कर दिया है।
हेडकाउंट पॉवर्टी रेशियो
हेडकाउंट पॉवर्टी रेशियो (HSR) के मुताबिक, साल 2011-12 में 12.2 फीसदी से घटकर 2022-23 में 2 प्रतिशत हो गया है। सरकार द्वारा आबादी के लगभग दो-तिहाई लोगों को दिए जाने वाले मुफ्त भोजन (गेहूं और चावल) और सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं शिक्षा के उपयोग को इस आंकड़े में शामिल नहीं किया गया है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि विश्व बैंक के अनुमानों की तुलना में भारत में गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले लोगों की संख्या काफी कम है।

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