नई दिल्ली। केंद्र सरकार के श्रम और रोजगार मंत्रालय ने 'कर्मचारी भविष्य निधि योजना, 2026' को आधिकारिक तौर पर अधिसूचित कर दिया है। सोशल सिक्योरिटी कोड, 2020 के तहत तैयार की गई यह नई योजना देश भर में लागू हो चुकी है। इस बड़े कदम के साथ ही केंद्र सरकार ने करीब छह दशक पुरानी 'ईपीएफ योजना, 1952' को पूरी तरह से बदल दिया है। हालांकि नौकरीपेशा लोगों के लिए राहत की बात यह है कि भविष्य निधि (पीएफ) का मुख्य ढांचा और मिलने वाले वित्तीय फायदे पहले जैसे ही रहेंगे, लेकिन इसके प्रशासनिक और डिजिटल तौर-तरीकों को बेहद आधुनिक बना दिया गया है।
पीएफ कटौती और यूएएन नंबर में कोई बदलाव नहीं
नए नियमों के लागू होने के बाद भी नौकरीपेशा लोगों की हर महीने होने वाली पीएफ कटौती की दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। कर्मचारी और नियोक्ता दोनों का अनिवार्य योगदान पहले की तरह ही मूल वेतन का 12-12 प्रतिशत बना रहेगा, जबकि कुछ विशेष अधिसूचित संस्थानों के लिए यह सीमा 10 प्रतिशत रहेगी। इसके अलावा कर्मचारियों का यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) भी पहले की तरह ही स्थायी रहेगा, जिससे नौकरी बदलने पर पीएफ ट्रांसफर करना आसान होगा। जो लोग पुरानी योजना के सदस्य थे, वे सीधे इस नई योजना में शामिल हो जाएंगे और उनकी पुरानी जमा पूंजी पूरी तरह सुरक्षित रहेगी।
स्वैच्छिक भविष्य निधि (VPF) के नियमों में लचीलापन
नई योजना में कर्मचारियों को अपनी मर्जी से वैधानिक सीमा से अधिक योगदान करने यानी स्वैच्छिक प्रोविडेंट फंड (VPF) के विकल्प में अधिक छूट और लचीलापन दिया गया है। नए प्रावधानों के तहत कंपनियां चाहें तो कर्मचारी द्वारा किए जाने वाले इस अतिरिक्त वीपीएफ योगदान के बराबर अपनी ओर से भी हिस्सा डाल सकती हैं। हालांकि, कंपनियों के लिए ऐसा करना कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं होगा, यह पूरी तरह से उनके अपने विवेक और आंतरिक नीतियों पर निर्भर करेगा।
प्राइवेट पीएफ ट्रस्टों के लिए तय किए कड़े नियम
जो बड़ी कंपनियां ईपीएफओ से छूट प्राप्त करके अपना खुद का निजी पीएफ ट्रस्ट चलाती हैं, उनके लिए सरकार ने नियम बेहद कड़े कर दिए हैं। अब इन सभी निजी ट्रस्टों के लिए अपने हर कर्मचारी का पूरा रिकॉर्ड इलेक्ट्रॉनिक रूप से रखना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही उन्हें कर्मचारियों को ऑनलाइन बैलेंस चेक करने की सुविधा और सालाना डिजिटल अकाउंट स्टेटमेंट देना होगा। पीएफ से पैसे निकालने, एडवांस लेने या अकाउंट ट्रांसफर करने के दावों का निपटारा अब एक तय समय सीमा के भीतर केवल ऑनलाइन और डिजिटल माध्यम से ही करना होगा।
नौकरीपेशा वर्ग पर होने वाला असर और लाभ
इस बड़े बदलाव का सीधा मतलब यह है कि आम कर्मचारियों की इन-हैंड सैलरी या पीएफ बचत पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। सरकार का पूरा ध्यान पीएफ की पूरी व्यवस्था को पारदर्शी, आधुनिक और पूरी तरह डिजिटल बनाने पर है। कागजी कार्रवाई खत्म होने से पीएफ खातों का मैनेजमेंट बेहद आसान हो जाएगा और कर्मचारियों को क्लेम सेटलमेंट की प्रक्रिया में होने वाली देरी से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाएगी।

More Stories
व्हाट्सएप यूजरनेम फीचर पर सरकार ने मांगा जवाब, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स डेटा लीक की जांच जारी
Nestle India का डबल तोहफा: फाइनल के साथ स्पेशल डिविडेंड भी, शेयर में उछाल
लोन ग्रोथ का असर: Bajaj Housing Finance के शेयर में 6% की छलांग, ब्रोकरेज भी हुआ बुलिश