वाराणसी| प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 महीने के अंतराल के बाद वाराणसी स्थित श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन किया। निर्धारित प्रोटोकॉल से करीब 40 मिनट अधिक समय बिताते हुए पीएम मोदी लगभग 65 मिनट तक बाबा के धाम में रहे। मंदिर परिसर में उनके आगमन पर 151 ब्राह्मणों के शंखनाद और 22 डमरुओं की गूँज के साथ भव्य स्वागत किया गया।
काशी विश्वनाथ धाम में विशेष अनुष्ठान मंदिर के गर्भगृह में प्रधानमंत्री ने षोडशोपचार विधि से करीब 15 मिनट तक विशेष पूजा-अर्चना की। इस दौरान तमिल ब्राह्मणों सहित 11 पुजारियों ने शिव स्तुति और वैदिक मंत्रोच्चार किया। पूजा संपन्न होने के बाद जब वे बाहर आए, तो स्थानीय नेताओं ने उन्हें उपहार स्वरूप त्रिशूल और डमरू भेंट किए, जिन्हें प्रधानमंत्री ने श्रद्धापूर्वक उठाकर वहां मौजूद भक्तों का अभिवादन किया। उन्हें मंदिर का मॉडल और अंगवस्त्रम भी प्रदान किया गया।
गंगा घाट का अवलोकन और विकास के निर्देश प्रधानमंत्री ने काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का बारीकी से निरीक्षण किया और वहां स्थापित विग्रहों व छोटे मंदिरों के बारे में जानकारी ली। इसके बाद वे गंगा द्वार होते हुए ललिता घाट तक पहुँचे, जहाँ उन्होंने माँ गंगा को नमन किया और घाटों व नावों पर सवार श्रद्धालुओं का हाथ हिलाकर अभिवादन स्वीकार किया।
प्रधानमंत्री ने मंदिर प्रशासन को निर्देश दिए कि:
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मां अन्नपूर्णा मंदिर के परिसर का और बेहतर विकास किया जाए।
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काशी के अन्य प्राचीन मंदिरों में भी सुविधाओं को विश्वस्तरीय बनाया जाए।
स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की कामना पीएम मोदी के स्वागत में तमिल विद्वान पंडित वेंकट रमन घनपाठी के नेतृत्व में 11 आचार्यों ने महामृत्युंजय मंत्र और शिव स्तुति का पाठ किया। विशेष अनुष्ठान के अंत में ब्राह्मणों ने प्रधानमंत्री के उत्तम स्वास्थ्य, आरोग्य और दीर्घायु जीवन के लिए 'शतमानं भवति' (आशीर्वाद मंत्र) का पाठ कर उनके शतायु होने की मंगलकामना की।

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