राजधानी में महंगी हुई बिजली: 500 यूनिट से अधिक खर्च करने वालों पर पड़ेगा सीधा असर

नई दिल्ली। दिल्ली के बिजली उपभोक्ताओं को बड़ा झटका लगने वाला है। दिल्ली बिजली नियामक आयोग (डीईआरसी) ने राजधानी की तीनों बिजली वितरण कंपनियों (बीआरपीएल, बीवायपीएल, और टीपीडीडीएल) को पावर परचेज एडजस्टमेंट चार्ज (पीपीएसी) नामक एक अतिरिक्त शुल्क वसूलने की अनुमति दे दी है। इस फैसले से जून महीने से बिजली के बिल बढ़ जाएंगे, खासकर उन उपभोक्ताओं के लिए जो मासिक 500 यूनिट से अधिक बिजली खर्च करते हैं।
यह दिल्ली में पहला मासिक पीपीएसी है, जो पहले हर तीन महीने में लागू होता था। अब हर महीने बिजली की दरों की समीक्षा की जाएगी। पीपीएसी बिजली उत्पादक कंपनियों से बिजली खरीदने की लागत में हुई बढ़ोतरी को उपभोक्ताओं तक पहुंचाने का एक तरीका है। कोयला और ईंधन की कीमतों में वृद्धि के कारण बिजली खरीद महंगी हुई थी। देश के 25 से अधिक राज्यों में यह शुल्क पहले से ही लागू है और इस कानूनी रूप से आवश्यक माना जाता है।
डीईआरसी की अनुमति के बाद, दिल्ली में बिजली की दरें कुल मिलाकर एक से 3.30 फीसदी तक महंगी हो सकती हैं। कंपनियों के लिए यह वृद्धि बीआरपीएल के लिए 17.94 फीसदी, बीवायपीएल के लिए 17.43 फीसदी और टीपीडीडीएल के लिए 16 फीसदी तक है। हालांकि, इस बढ़ोतरी का सीधा असर सब्सिडी वाले उपभोक्ताओं, यानी 200 से 500 यूनिट तक का लाभ लेने वालों पर नहीं पड़ेगा। दिल्ली सरकार की सब्सिडी बिल की रकम पर नहीं, बल्कि खपत की गई यूनिट्स पर आधारित है। लेकिन, 500 यूनिट से अधिक बिजली खर्च करने वाले या सब्सिडी से बाहर के उपभोक्ताओं के अप्रैल के बिजली बिल (जो जून में आएगा) में सात से 18 फीसदी तक अतिरिक्त सरचार्ज लग सकता है।
इस फैसले के पीछे कंपनियों का तर्क है कि जनरेटरों को समय पर भुगतान करने और वित्तीय संकट व ब्याज के बोझ से बचने के लिए पीपीएसी आवश्यक है। हालांकि, पावर एक्सपर्ट ने इस निर्णय की आलोचना की है। उनके अनुसार, डीईआरसी ने बिना किसी कैग ऑडिट के उपभोक्ताओं पर भारी बोझ डालते हुए इसकी अनुमति दी है। उन्होंने लगभग 38,500 करोड़ रुपये की नियामक परिसंपत्तियों के भारी बोझ का भी जिक्र किया, जिसे उपभोक्ताओं से वसूला जाना है।