October 12, 2026

भारत ने संयुक्त राष्ट्र को सुनाई खरी-खरी? आंतरिक मामलों में दखल न देने की दी नसीहत

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में शनिवार को हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों और इस दौरान की गई धरपकड़ पर भारत सरकार और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्च कमिश्नर के कार्यालय (OHCHR) के बीच तीखी जुबानी जंग छिड़ गई है। भारत ने प्रदर्शनकारियों की सामूहिक हिरासत को लेकर संयुक्त राष्ट्र द्वारा जताई गई चिंता पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराते हुए इसे देश के आंतरिक मामलों में पूरी तरह अनुचित हस्तक्षेप करार दिया है।

'भारत दुनिया का सबसे मजबूत लोकतंत्र' – भारत का संयुक्त राष्ट्र को जवाब

भारत ने दो टूक शब्दों में कहा है कि वह दुनिया का सबसे बड़ा और जीवंत लोकतंत्र है, जहां नागरिकों को शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने और अपनी बात रखने का अधिकार देश का संविधान प्रदान करता है। इसके अलावा, देश में एक मजबूत संस्थागत व्यवस्था, पूरी तरह स्वतंत्र न्यायपालिका और निष्पक्ष मीडिया मौजूद है, जो नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करने में सक्षम है।

भारत की यह आधिकारिक प्रतिक्रिया सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर उसके आधिकारिक खाते 'इंडिया एट यूएन' के माध्यम से दी गई। नई दिल्ली ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय को उसकी तटस्थता और निष्पक्षता बनाए रखने की सख्त नसीहत देते हुए कहा कि उसे दुनिया के अन्य हिस्सों में हो रहे बड़े प्रदर्शनों और मानवाधिकार उल्लंघनों पर भी समान रूप से ध्यान देना चाहिए।

भारत ने OHCHR की चिंताओं को बताया आधारहीन

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने दिल्ली में बड़े पैमाने पर हुए प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों, आंदोलन से जुड़े प्रमुख नेताओं, नागरिक समाज संगठनों के सदस्यों, वकीलों और पत्रकारों को हिरासत में लिए जाने की खबरों पर चिंता व्यक्त की थी। इसके जवाब में भारत ने स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार संविधान के तहत सुरक्षित अवश्य है, लेकिन लोकतांत्रिक व्यवस्था में इस अधिकार का उपयोग सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा बनाए रखने के लिए निर्धारित उचित कानूनी प्रतिबंधों के अधीन होता है।

भारत के अनुसार, देश की कानून-व्यवस्था लागू करने वाली एजेंसियां पूरी तरह से विधिक प्रावधानों के अनुरूप काम करती हैं और किसी भी नागरिक की शिकायत के समाधान के लिए स्वतंत्र अदालतें मौजूद हैं। नई दिल्ली ने अपने बयान में दोहराया कि OHCHR की टिप्पणियां गलत संदर्भ पर आधारित हैं और यह भारत के आंतरिक मामलों में अनावश्यक दखलअंदाजी है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र से आग्रह किया कि वह अपने गैर-चयनात्मक रवैये के सिद्धांतों का पालन करते हुए अन्य स्थानों पर होने वाले प्रदर्शनों का भी निष्पक्ष आकलन करे।

दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से पहले 3,000 से अधिक लोग हिरासत में

यह पूरा विवाद दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर बुलाए गए एक विरोध प्रदर्शन के दौरान सामने आया। रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए करीब 3,000 लोगों को हिरासत में लिया, जिनमें विभिन्न प्रदर्शनकारी, संबंधित राजनीतिक संगठनों के समर्थक और कई विपक्षी नेता शामिल थे। ये सभी लोग जंतर-मंतर पर पहुंचकर धरना-प्रदर्शन करना चाहते थे।

हालांकि, दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर इस प्रदर्शन के लिए दिए गए अनुमति आवेदन को पहले ही अस्वीकार कर दिया था। इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए राजधानी में सुरक्षा और परिवहन संबंधी कड़े प्रतिबंध लगाए गए थे। प्रदर्शनकारियों को दिल्ली में प्रवेश करने से रोकने के लिए मेट्रो, बस और रेल सेवाओं सहित इंटरनेट पर भी आवश्यक पाबंदियां लागू की गई थीं।

विमान से उतरते ही हिरासत में लिए गए सीजेपी नेता

शनिवार की सुबह मुंबई से दिल्ली पहुंचे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके और उनके दो अन्य सहयोगियों—सौरव दास तथा आशुतोष रांका—को उनके विमान के उतरने के तुरंत बाद हवाई अड्डे पर ही हिरासत में ले लिया गया। हालांकि, पुलिस की प्रारंभिक कार्रवाई और एहतियाती कदमों के बाद अधिकांश हिरासत में लिए गए लोगों को बाद में रिहा कर दिया गया।

संयुक्त राष्ट्र ने की शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार के सम्मान की अपील

दूसरी ओर, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के प्रवक्ता थामीन अल-खीथान ने शनिवार को एक बयान जारी कर दिल्ली में बड़े पैमाने पर हुए प्रदर्शनों से पहले और उनके दौरान की गई सामूहिक गिरफ्तारियों पर अपनी चिंता दोहराई। उन्होंने भारतीय अधिकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने और अपनी बात रखने के अधिकार का पूर्ण सम्मान सुनिश्चित करने की अपील की।

संयुक्त राष्ट्र ने यह भी कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर लगाए जाने वाले किसी भी प्रकार के प्रतिबंध को 'आवश्यकता' और 'आनुपातिकता' की कड़ी कसौटियों पर खरा उतरना चाहिए। अल-खीथान ने कानून लागू करने वाले बलों से प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान संयम बरतने का आग्रह करते हुए संबंधित मुद्दों को सुलझाने के लिए सार्थक संवाद शुरू करने की सलाह दी है।