नई दिल्ली। नीट परीक्षा में हुई धांधली और पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में जारी हंगामे के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। पद छोड़ने के बाद उनके इस कदम को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। इसी गहमागहमी के बीच मध्य प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री और भाजपा के दिग्गज नेता कैलाश विजयवर्गीय के एक बयान ने इस मामले को नया मोड़ दे दिया है।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन शुरू होते ही दिया था प्रस्ताव
इंदौर में मीडिया से बातचीत करते हुए कैलाश विजयवर्गीय ने एक बड़ा दावा किया है। उन्होंने बताया कि धर्मेंद्र प्रधान ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों और विपक्ष का विरोध प्रदर्शन शुरू होने के पहले ही दिन अपने पद से हटने की मंशा जाहिर कर दी थी। विजयवर्गीय के अनुसार, शिक्षा मंत्री ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के सामने यह स्पष्ट कर दिया था कि यदि संगठन या सरकार की साख के लिए आवश्यक हो, तो वे स्वेच्छा से अपना पद छोड़ने को तैयार हैं।
राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज
कैलाश विजयवर्गीय के इस खुलासे के बाद भाजपा के आंतरिक घटनाक्रम और भावी रणनीति को लेकर सियासी चर्चाएं और ज्यादा गर्म हो गई हैं। एक तरफ जहां विपक्ष इस इस्तीफे को अपनी नैतिक जीत बता रहा है, वहीं दूसरी तरफ पार्टी के भीतर इसे जिम्मेदारी और शुचिता की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है। फिलहाल इस पूरे मामले पर केंद्रीय नेतृत्व की ओर से आगामी कदमों का इंतजार किया जा रहा है।

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