कांग्रेस की अंदरूनी कलह पर मंथन: चन्नी दिल्ली पहुंचे, 5 दिन तक नेताओं से करेंगे बातचीत

चंडीगढ़। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब कांग्रेस के भीतर मचे घमासान और असंतुष्ट नेताओं को साधने के लिए प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल सोमवार की शाम यहां पहुंच गए हैं। हालांकि, उनके आगमन से ठीक पहले बागी सुरों की अगुवाई कर रहे पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी अपने कुछ खासमखास समर्थकों के साथ आलाकमान से सीधी बात करने के लिए दिल्ली रवाना हो गए। पंजाब कांग्रेस में मचे इस आंतरिक संकट के बीच भूपेश बघेल का यह दौरा बेहद अहम माना जा रहा है।

चन्नी का दिल्ली में डेरा और आलाकमान से मिलने की कवायद

पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का दावा है कि राहुल गांधी सात जुलाई को अपने विदेशी दौरे से स्वदेश लौट रहे हैं, और चरणजीत सिंह चन्नी उनसे मुलाकात करने के लिए दिल्ली में ही डटे रह सकते हैं। चन्नी समर्थकों का कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री किसी भी स्थानीय स्तर की वार्ता से पहले केंद्रीय नेतृत्व के समक्ष कार्यकर्ताओं और नेताओं की वास्तविक चिंताओं को प्रमुखता से रखना चाहते हैं। दिल्ली कूच करने से पहले चन्नी ने सोमवार सुबह चुनाव प्रचार समिति की एक आवश्यक बैठक भी बुलाई थी।

पांच दिवसीय मैराथन बैठकों का खाका और चुनावी समितियां

दूसरी तरफ चंडीगढ़ पहुंचे प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल ने स्पष्ट कर दिया है कि वे पूरे पांच दिनों तक पंजाब में डेरा डालेंगे। इस दौरान वे चुनावी रणनीति के तहत बनाई गई प्रचार कमेटी, कोर ग्रुप, चुनाव प्रबंधन, समन्वय समिति और घोषणापत्र समिति के प्रमुखों व सदस्यों के साथ सिलसिलेवार समीक्षा बैठकें करेंगे। इसके अलावा वे यूथ कांग्रेस के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों से मिलकर उनका स्वागत करेंगे। चन्नी की अनुपस्थिति में प्रचार समिति की बैठक होगी या नहीं, इस पर सस्पेंस बरकरार है, लेकिन बघेल ने कहा है कि एक लोकतांत्रिक दल होने के नाते वे हर नेता की बात गंभीरता से सुनेंगे।

एकजुटता के दावे और सत्ताधारी दल से मुकाबले की हुंकार

कांग्रेस के भीतर मची इस खींचतान को खारिज करते हुए पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कोर कमेटी की बैठक के बाद दावा किया कि पार्टी पूरी तरह अखंड है। वहीं प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने भी बिखराव की खबरों को सिरे से नकारते हुए तल्ख अंदाज में कहा कि वे किसी के दिल्ली दौरे का हिसाब नहीं रखते। वड़िंग ने भरोसा जताया कि प्रताप सिंह बाजवा, चरणजीत सिंह चन्नी, विजइंदर सिंगला और सुखजिंदर रंधावा समेत तमाम दिग्गज नेता बहुत जल्द एक साथ मंच पर नजर आएंगे, क्योंकि कांग्रेस की असली लड़ाई आपस में नहीं बल्कि सूबे की मौजूदा आम आदमी पार्टी सरकार के खिलाफ है।