हरियाणा में 687 गैर-मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूलों पर गिरेगी गाज, दाखिलों पर रोक

हिसार:शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत गरीब बच्चों के लिए आरक्षित सीटें न दिखाने और नियमों की अनदेखी करने वाले निजी स्कूलों के खिलाफ शिक्षा निदेशालय ने अपना रुख बेहद सख्त कर लिया है। निदेशालय द्वारा प्रदेश के 22 जिलों में कराए गए एक विशेष गोपनीय सर्वे में 687 ऐसे निजी स्कूल चिन्हित किए गए हैं, जो पिछले तीन साल से उच्च अधिकारियों की आंखों में धूल झोंककर बिना वैध दस्तावेजों के ही संचालित हो रहे थे। शिक्षा के नाम पर व्यावसायिक गतिविधियां चलाने वाले इन संस्थानों पर अब प्रशासनिक गाज गिरना तय हो गया है। निदेशालय ने इस गंभीर गड़बड़ी को संज्ञान में लेते हुए इन सभी दोषी स्कूलों की दाखिला प्रक्रिया और छात्र प्रवेश की शक्तियों को तत्काल प्रभाव से छीनने का कड़ा फैसला लिया है।

सर्वे रिपोर्ट में हुआ फर्जीवाड़े का बड़ा खुलासा

शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी की गई विस्तृत सर्वे रिपोर्ट में इन स्कूलों की कार्यप्रणाली को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच के दौरान चिन्हित किए गए 687 निजी स्कूलों के पास न तो सरकार या विभाग द्वारा जारी की गई आधिकारिक मान्यता से संबंधित वैध दस्तावेज मिले और ना ही उनके पास एक तय समयावधि के भीतर नए दाखिले करने का कोई कानूनी अधिकार पत्र पाया गया। इस गंभीर लापरवाही और नियमों के उल्लंघन को देखते हुए मुख्यालय ने प्रदेश के सभी जिला उपायुक्तों (डीसी) को एक आधिकारिक पत्र भेजने का निर्णय लिया है, ताकि इन गैर-मान्यता प्राप्त और अवैध रूप से चल रहे स्कूलों के खिलाफ जमीनी स्तर पर सीलिंग और अन्य सख्त दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

सैकड़ों स्कूलों ने सुधारी गलती, दिखाईं आरक्षित सीटें

इस पूरी कार्रवाई से पहले सरकार और शिक्षा विभाग ने प्रदेश भर के लगभग 1100 संदिग्ध निजी स्कूलों को चिन्हित कर एक सूची तैयार की थी। इन सभी संस्थानों को अपने मान्यता और संचालन से जुड़े जरूरी दस्तावेजों को पूरा करने और कमियों को सुधारने के लिए विभाग की ओर से पर्याप्त समय और अवसर दिया गया था। इस कड़े अल्टीमेटम का असर यह हुआ कि प्रदेश के 413 निजी स्कूलों ने अपनी गलती सुधारते हुए निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने सभी कागजात पूरे कर विभाग को सौंप दिए। इसके साथ ही इन स्कूलों ने नियमों का पालन करते हुए आरटीई के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए लगभग 3 हजार सीटें भी पोर्टल पर घोषित कर दीं, जिसके बाद सरकार ने राहत देते हुए शेष दोषी स्कूलों पर कार्रवाई के अंतिम आदेश जारी कर दिए।

दाखिले के लिए एक किलोमीटर का दायरा और समय सीमा तय

इस बार आरटीई के तहत दाखिला प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और स्थानीय स्तर पर सुलभ बनाने के लिए सरकार ने दूरी के नियमों में स्पष्टता रखी है। नए नियमों के अनुसार, छात्र के घर से केवल एक किलोमीटर के दायरे में आने वाले मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में ही इस कल्याणकारी योजना के तहत मुफ्त दाखिले के लिए आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। योग्य और इच्छुक विद्यार्थी आगामी 6 जुलाई तक विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।

अभिभावकों की सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी

दाखिले की इस पूरी प्रक्रिया के दौरान अभिभावकों को होने वाली किसी भी प्रकार की तकनीकी असुविधा, कतार या स्कूलों द्वारा की जाने वाली मनमानी की शिकायतों के निवारण के लिए शिक्षा विभाग ने एक विशेष राज्य स्तरीय हेल्पलाइन नंबर 0172-5049801 भी जारी कर दिया है। यदि किसी भी अभिभावक को आवेदन करने में कोई परेशानी आती है या कोई स्कूल आरटीई के तहत दाखिला देने से मना करता है, तो वे सीधे इस हेल्पलाइन नंबर पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं, जिस पर विभाग की विशेष विंग द्वारा तुरंत संज्ञान लेकर त्वरित कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।