1.89 करोड़ की ठगी, दंपती बने शिकार; तीन आरोपी गिरफ्तार

धारूहेड़ा: डिजिटल अरेस्ट के जरिए एक बुजुर्ग दंपती से 1.89 करोड़ रुपये की सनसनीखेज साइबर ठगी के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने इस गिरोह के तीन और गुर्गों को दबोच लिया है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान जींद के न्यू हाउसिंग बोर्ड निवासी मनोज श्योकन्द, गांव करेला के पंकज और जोगेंद्र नगर के हरप्रीत के रूप में हुई है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में पुलिस सात आरोपियों को पहले ही सलाखों के पीछे भेज चुकी है, जिसके बाद अब कुल गिरफ्तारियों की संख्या दस हो गई है।

'सिम बंद होने और अश्लील वीडियो' का डर दिखाकर जाल में फंसाया

ठगी का यह खौफनाक खेल धारूहेड़ा के सेक्टर-6 निवासी रिटायर्ड कर्मचारी राजपाल सिंह के साथ खेला गया। पीड़ित ने पुलिस को बताया कि बीती 27 और 28 फरवरी को उनके पास अनजान नंबरों से कॉल आए। फोन करने वाले ने खुद को 'ट्राई' (TRAI) का अधिकारी बताते हुए डराया कि उनकी आईडी पर फर्जी सिम एक्टिवेट है, जिससे अश्लील तस्वीरें और वीडियो भेजे जा रहे हैं। ठगों ने पीड़ित को झांसा दिया कि इस मामले में उनके खिलाफ मुंबई में एक एफआईआर (FIR) भी दर्ज हो चुकी है।

खुद को सीबीआई इंस्पेक्टर और जज बताकर किया डिजिटल अरेस्ट, कमरे में रखा बंधक

इसके बाद जालसाजों ने पीड़ित से संपर्क कर खुद को सीबीआई (CBI) इंस्पेक्टर और फर्जी जज बताया। उन्होंने दंपती को कानूनी कार्रवाई का खौफ दिखाकर 'डिजिटल अरेस्ट' कर लिया और फोन पर एक संदिग्ध ऐप डाउनलोड करवाकर उन पर चौबीसों घंटे नजर रखने लगे। डर के मारे बुजुर्ग दंपती कई दिनों तक अपने ही कमरे में बंधक बने रहे। ठगों ने मनी लॉन्ड्रिंग के केस में फंसाने और प्रॉपर्टी वेरिफिकेशन के नाम पर 3 मार्च से 20 अप्रैल के बीच डरा-धमकाकर अलग-अलग खातों में कुल 1 करोड़ 89 लाख 28 हजार रुपये ट्रांसफर करवा लिए।

बैंक खाते और दलाली का नेटवर्क; तीन नए आरोपी पुलिस की गिरफ्त में

साइबर सेल और स्थानीय पुलिस की जांच में सामने आया कि पकड़े गए नए आरोपियों में से मनोज श्योकन्द के बैंक अकाउंट में ठगी की रकम से 1 लाख 8 हजार रुपये भेजे गए थे। वहीं, पंकज और हरप्रीत ने मुख्य साइबर ठगों को बैंक खाते उपलब्ध कराने के लिए बिचौलियों (दलालों) के रूप में काम किया था। पुलिस ने तीनों को कोर्ट में पेश किया, जहां से अदालत ने मनोज को जेल भेज दिया है, जबकि पंकज और हरप्रीत को दो दिन के पुलिस रिमांड पर सौंपा है ताकि गिरोह के अन्य नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके।