भर्ती में भ्रष्टाचार का खुलासा, स्वास्थ्य विभाग में मची खलबली

लखनऊ:उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में डार्क रूम सहायकों (Dark Room Assistants) की नियुक्ति में गंभीर अनियमितताओं और नियमों के उल्लंघन का एक बड़ा मामला सामने आया है। शासन द्वारा आधिकारिक रूप से रोक लगाए जाने के बावजूद, मृतक आश्रित कोटे के तहत पिछले कुछ वर्षों में बैकडोर से कई नियुक्तियां दे दी गईं।

1 जुलाई 2021 से लागू थी भर्ती पर रोक

इस पूरे खेल की शुरुआत तब हुई जब तत्कालीन स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. डीएस नेगी ने 1 जुलाई 2021 को प्रदेश के सभी अस्पतालों के निदेशकों, मुख्य चिकित्साधिकारियों (CMO), अधीक्षकों और मेडिकल कॉलेजों के प्रधानाचार्यों को एक सख्त पत्र जारी किया था।

अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 8 जून 2021 को हुई उच्च स्तरीय बैठक के निर्णय के बाद यह आदेश जारी हुआ था। इसके तहत डार्क रूम सहायक के स्वीकृत 1029 पदों में से 541 पदों को मृत (समान्यतः समाप्त) घोषित कर दिया गया था और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए थे कि मृतक आश्रित का कोई भी नया मामला महानिदेशालय को न भेजा जाए।

महानिदेशक के सेवानिवृत्त होते ही बदला खेल

आदेश के मुताबिक इन पदों पर नई भर्ती पूरी तरह प्रतिबंधित थी। लेकिन जैसे ही तत्कालीन महानिदेशक सेवानिवृत्त हुए, महानिदेशालय के कुछ अधिकारियों ने नियमों को ताक पर रख दिया। रोक के आदेश के बावजूद मृतक आश्रित कोटे का हवाला देकर चुपके से नियुक्तियां बांट दी गईं।

आंकड़ों में सामने आई गड़बड़ी की हकीकत

मानव संपदा पोर्टल (Manav Sampada Portal) पर दर्ज आधिकारिक आंकड़ों ने इस पूरी धांधली की पोल खोलकर रख दी है:

वर्ष कार्यरत डार्क रूम सहायकों की संख्या स्थिति
वर्ष 2021 478 कर्मचारी भर्ती पर पूर्ण रोक का आदेश जारी
वर्ष 2026 544 कर्मचारी रोक के बावजूद संख्या में 66 पदों का इजाफा

पोर्टल पर डेटा मौजूद:भर्ती पर कड़ा प्रतिबंध होने के बावजूद कर्मचारियों की संख्या 478 से बढ़कर 544 कैसे हो गई, इसका पूरा विवरण मानव संपदा पोर्टल पर ऑनलाइन उपलब्ध है, जो सीधे तौर पर नियमों के उल्लंघन को दर्शाता है। इस मामले के सामने आने के बाद अब स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।