October 22, 2026

प्रदर्शनी से तस्वीरें हटाने पर विवाद, गहलोत ने कार्रवाई को लोकतंत्र पर हमला बताया

जयपुर। दिल्ली के बीकानेर हाउस में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के बेटे रेहान वाड्रा की फोटो प्रदर्शनी से तस्वीरें हटाए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस घटना को लेकर राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इस कार्रवाई को सीधे तौर पर सेंसरशिप करार देते हुए इसे लोकतंत्र पर करारा प्रहार बताया है।

अशोक गहलोत का तीखा हमला और आरोप

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बीकानेर हाउस में आयोजित रेहान वाड्रा की इस फोटो प्रदर्शनी से सत्तर से अधिक तस्वीरों को जबरन हटा दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि चूंकि बीकानेर हाउस राजस्थान सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है, इसलिए भाजपा सरकार की सीधी निगरानी में एक युवा कलाकार की कलात्मक अभिव्यक्ति का गला घोंटने का यह प्रयास अत्यंत निंदनीय है।

युवा आंदोलनों की तस्वीरों और तिरंगे पर विवाद

कांग्रेस नेता के अनुसार इस प्रदर्शनी में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हुए विभिन्न युवा आंदोलनों की कई तस्वीरें प्रमुखता से शामिल थीं। उनका कहना है कि सत्ताधारी दल उन तमाम सच्चाइयों से भय खाता है जो जनता के बीच उजागर होती हैं। इसके अलावा प्रदर्शनी के दौरान तिरंगे से जुड़ी दो तस्वीरें भी हटाने का दबाव बनाया गया, लेकिन युवा कलाकार रेहान वाड्रा ने ऐसा करने से दो टूक इंकार कर दिया। उनकी इस दृढता की सराहना करते हुए गहलोत ने कहा कि कलाकारों की आवाज को दबाना और सच्चाई बयां करने वाली तस्वीरों को हटाना तानाशाही का स्पष्ट प्रमाण है।

प्रियंका गांधी ने जताया बेटे पर गर्व

इस पूरे विवाद के बीच कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी अपने बेटे के समर्थन में खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा कि जब सिंहासन पर बैठा कोई व्यक्ति किसी अन्य की अभिव्यक्ति से भयभीत होने लगे, तो वह उस शक्ति को बचाने के प्रयास में अपनी असल ताकत बहुत पहले ही गंवा चुका होता है। उन्होंने कहा कि उनका बेटा सच्चाई के मार्ग पर अडिग है और उन्हें उसकी इस बात पर हमेशा गर्व रहेगा। आपको बता दें कि रेहान वाड्रा की इस चर्चित फोटो प्रदर्शनी का शीर्षक 'नो आइडिया इज फाइनल' रखा गया था, जिसका उद्घाटन तय कार्यक्रम के तहत होना था, लेकिन तस्वीरों को हटाए जाने के आरोपों के बाद यह पूरा आयोजन राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बन गया है।