बेमेतरा| छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में पुलिस विभाग के भीतर अनुशासनहीनता के खिलाफ एक बेहद कड़ा संदेश देते हुए जिला पुलिस प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। लगातार 77 दिनों तक बिना किसी पूर्व अनुमति के अपनी ड्यूटी से नदारद रहने वाले आरक्षक विवेक पोद्दार को पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। विभागीय जांच में गंभीर आरोप साबित होने के बाद पुलिस अधीक्षक (एसपी) त्रिलोक बंसल ने इस बर्खास्तगी का औपचारिक आदेश जारी कर दिया है। इसके साथ ही, उसकी अनुपस्थिति की पूरी अवधि को 'कार्य नहीं, वेतन नहीं' के स्थापित नियम के तहत पूरी तरह अवैतनिक घोषित कर दिया गया है।
3 जून से 18 अगस्त तक ड्यूटी से गायब रहा आरक्षक
पुलिस विभाग से प्राप्त आधिकारिक विवरण के अनुसार, आरक्षक विवेक पोद्दार की ड्यूटी 3 जून 2025 को 'बंदी पेशी' जैसे महत्वपूर्ण कार्य के लिए लगाई गई थी, लेकिन वह उसी दिन से बिना किसी सक्षम अधिकारी की अनुमति और विभाग को बिना कोई आधिकारिक सूचना दिए ड्यूटी से गायब हो गया। वह 3 जून से लेकर 18 अगस्त 2025 तक लगातार 77 दिनों तक ड्यूटी पर वापस नहीं लौटा। इस लंबी अवधि के दौरान विभाग की ओर से उसे कई बार औपचारिक नोटिस जारी किए गए, स्पष्टीकरण मांगा गया और तत्काल ड्यूटी पर उपस्थित होने के कड़े निर्देश दिए गए, लेकिन उसकी तरफ से कोई भी संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया।
विभागीय जांच में प्रमाणित हुए गंभीर आरोप
चली लंबी विभागीय जांच के दौरान आरक्षक को अपना पक्ष रखने और सफाई देने का पूरा अवसर प्रदान किया गया। हालांकि, उपलब्ध तमाम साक्ष्यों, आधिकारिक दस्तावेजों और उसके पुराने सेवा अभिलेखों (सर्विस रिकॉर्ड) की गहन समीक्षा के बाद उस पर लगे सभी आरोप पूरी तरह प्रमाणित पाए गए। जांच में यह तथ्य भी खुलकर सामने आया कि इस आरक्षक का पिछला सेवा रिकॉर्ड भी लगातार अनुशासनहीनता से भरा रहा है।
पूर्व में भी मिल चुकी थीं कई बड़ी और छोटी सजाएं
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, बर्खास्त किए गए आरक्षक विवेक पोद्दार को पहले भी अपनी कार्यशैली के चलते तीन छोटी और एक बड़ी विभागीय सजा मिल चुकी थी। विभाग की तरफ से उसे सुधरने का अंतिम अवसर देते हुए उसकी वार्षिक वेतन वृद्धि (इंक्रीमेंट) तक रोकी जा चुकी थी, इसके बावजूद उसके आचरण और कार्यव्यवहार में कोई सुधार नहीं आया। अपने पूरे सेवाकाल के दौरान वह कुल पांच बार अनधिकृत रूप से ड्यूटी से गायब रह चुका था।
इसके अतिरिक्त, उसके खिलाफ दो अन्य आपराधिक प्रकरण भी दर्ज हैं तथा जिला दुर्ग में एक अन्य विभागीय जांच अभी भी विचाराधीन व लंबित है। हालांकि विभाग का यह स्पष्ट करना है कि इन मामलों का इस तात्कालिक कार्रवाई से सीधा संबंध नहीं था, लेकिन अनुशासनहीनता के उसके समग्र सेवा आचरण को ध्यान में रखते हुए यह कड़ा कदम उठाया गया है।
एसपी त्रिलोक बंसल की दो टूक: "अनुशासन से समझौता बर्दाश्त नहीं"
इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए बेमेतरा के पुलिस अधीक्षक त्रिलोक बंसल ने दो टूक शब्दों में कहा कि पुलिस जैसी बेहद संवेदनशील और अनुशासित वर्दीधारी सेवा में कर्तव्यों के प्रति लापरवाही तथा इस तरह की लंबी अनधिकृत अनुपस्थिति को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी है कि विभाग में अनुशासन हमेशा से सर्वोच्च प्राथमिकता रहा है और भविष्य में भी नियमों की अवहेलना करने वालों के खिलाफ इसी प्रकार की कठोर कार्रवाई निरंतर जारी रखी जाएगी।

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