September 23, 2026

कांग्रेस विधायक यशवंतरायगौड़ा पाटिल ने फिर दिया इस्तीफा, सरकार पर लगाए आरोप

बेंगलुरु। कर्नाटक के कांग्रेस विधायक यशवंतरायगौड़ा पाटील ने विजयपुरा जिले के इंडी विधानसभा क्षेत्र को सूखाग्रस्त घोषित नहीं किए जाने से क्षुब्ध होकर विधानसभा अध्यक्ष जीएस पाटील को अपना त्यागपत्र सौंप दिया है। पाटील ने कहा कि वह अपने क्षेत्र की जनता की अपेक्षाओं और मांगों को पूरा करने में स्वयं को असमर्थ महसूस कर रहे हैं। उन्होंने वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में केवल प्रभावशाली एवं दबाव बनाने वाले घटकों को ही प्राथमिकता मिलने का गंभीर आरोप भी लगाया।

इंडी तालुक में सूखे के हालात और विधायक की चिंताएँ

विधायक ने 22 सितंबर को प्रेषित अपने पत्र में उल्लेख किया कि वर्ष 2026-27 के खरीफ सत्र के दौरान इंडी तालुक भीषण सूखे की चपेट में आ गया। मानसून की शुरुआत में हुई प्रारंभिक वर्षा के बाद किसानों ने ऋण लेकर बीज व उर्वरक खरीदे और बुवाई संपन्न की। किंतु, तत्पश्चात वर्षा न होने के कारण फसलें पूरी तरह नष्ट हो गईं। यशवंतरायगौड़ा पाटील ने चिंता व्यक्त की कि इंडी क्षेत्र में न केवल कृषि का संकट गहराया है, बल्कि आम नागरिकों और मवेशियों के समक्ष पेयजल की गंभीर किल्लत पैदा हो गई है। इसी पृष्ठभूमि में उन्होंने राज्य सरकार से क्षेत्र को अविलंब सूखाग्रस्त घोषित करने का आग्रह किया था।

सरकार के समक्ष रखी गई मांगें और मौजूदा स्थिति

यशवंतरायगौड़ा पाटील के अनुसार, उन्होंने गत 28 अगस्त को मुख्यमंत्री एवं उपमुख्यमंत्री के समक्ष इंडी तालुक को आधिकारिक रूप से सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग रखी थी। उनका कहना है कि बारंबार अनुरोध के उपरांत भी इंडी को सूखा प्रभावित तालुकों की सूची में सम्मिलित नहीं किया गया।

उल्लेखनीय है कि विजयपुरा जिले के कुल 13 तालुकों में से 11 तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया जा चुका है। पाटील ने स्पष्ट किया कि केवल इंडी और चडचन तालुक ही इस सूची से वंचित रह गए हैं। राज्य स्तर पर अब तक 188 तालुक सूखाग्रस्त घोषित किए जा चुके हैं। उपमुख्यमंत्री जी परमेश्वर के अनुसार आने वाले दिनों में यह आंकड़ा 200 तक पहुंच सकता है। प्रथम चरण में 101 तालुक, द्वितीय चरण में 23 तथा हाल ही में 53 अन्य तालुकों को इस सूची में जोड़ा गया था।

त्यागपत्र देने का मुख्य कारण

अपने पत्र में यशवंतरायगौड़ा पाटील ने लिखा कि सत्ताधारी दल के प्रतिनिधि होने के नाते उन्होंने सदैव संयमित ढंग से सरकार के समक्ष जनसमस्याओं को प्रस्तुत किया, ताकि शासन को किसी असहज स्थिति का सामना न करना पड़े। किंतु, अब उन्हें अनुभव हो रहा है कि उनकी जनहितैषी मांगों और भावनाओं की अनदेखी की जा रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण एवं नियमानुकूल अपनी बात रखने वालों के स्थान पर दबाव समूह और प्रभावशाली व्यक्तित्वों को अधिक तवज्जो दी जा रही है। इसी निराशा के चलते उन्होंने स्वेच्छा से विधायक पद त्यागने का निर्णय लिया।

इस्तीफे से जुड़ा पिछला घटनाक्रम

यह पहला अवसर नहीं है जब यशवंतरायगौड़ा पाटील ने अपना त्यागपत्र दिया है। इससे पूर्व 3 अगस्त को भी उनका इस्तीफा चर्चा में आया था, जब वे कर्नाटक मंत्रिमंडल विस्तार में स्थान न मिलने से असंतुष्ट थे। हालांकि, उस समय पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने मध्यस्थता करते हुए उन्हें त्यागपत्र वापस लेने के लिए सहमत कर लिया था।