हल्द्वानी | उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की एक सार्वजनिक सभा के बाद हुए कथित 'शुद्धिकरण' कार्यक्रम और उस पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयान के सिलसिले में दर्ज एफआईआर को लेकर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस पार्टी ने इस कार्रवाई पर कड़ा ऐतराज जताते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला है और कहा है कि वे इस कानूनी कदम का लोकतांत्रिक व कानूनी तरीके से डटकर मुकाबला करेंगे। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि दलित सम्मान और सामाजिक न्याय की लड़ाई हर हाल में जारी रहेगी।
राहुल गांधी पर दर्ज एफआईआर पर कांग्रेस का पलटवार
कांग्रेस महासचिव और उत्तराखंड प्रभारी कुमारी सैलजा ने इस एफआईआर को लेकर राज्य की भाजपा सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि यह बेहद विडंबनापूर्ण है कि खरगे की सभा के बाद कथित तौर पर 'शुद्धिकरण' जैसे कृत्यों को अंजाम देने वाले उपद्रवियों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, बल्कि इसके विपरीत जिन्होंने इस घिनौनी मानसिकता के खिलाफ आवाज उठाई, उन राहुल गांधी के खिलाफ ही मामला दर्ज कर लिया गया।
सैलजा ने आरोप लगाया कि पहले सरेआम शुद्धिकरण का कार्यक्रम किया गया और फिर उत्तराखंड के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने सार्वजनिक रूप से उसका बचाव किया। जब राहुल गांधी ने ऐसे तत्वों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग उठाई, तो उलटे उन्हीं पर मुकदमे लाद दिए गए। उन्होंने इसे महज एक इत्तेफाक मानने से इनकार करते हुए इसे भाजपा और आरएसएस की 'दलित विरोधी और संविधान विरोधी' मानसिकता का स्पष्ट उदाहरण बताया।
'गांधी परिवार डरने वाला नहीं है'
कुमारी सैलजा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस पूरे प्रकरण पर चुप्पी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि भाजपा और आरएसएस को यह गलतफहमी अपने मन से निकाल देनी चाहिए कि मुकदमों के डर से राहुल गांधी या कांग्रेस पार्टी कभी पीछे हट जाएगी। उन्होंने कहा, "यह गांधी परिवार है, जिसका देश के लिए त्याग, बलिदान और समर्पण का एक गौरवशाली इतिहास रहा है। न तो कोई एफआईआर और न ही सत्ता का कोई दबाव इस मुखर आवाज को डरा या चुप करा सकता है।"
कांग्रेस नेताओं ने जोर देकर कहा कि पार्टी इस राजनीतिक और कानूनी कार्रवाई का मुंहतोड़ जवाब देगी। साथ ही, दलितों के सम्मान, देश के संविधान की रक्षा और जातिवादी मानसिकता के खात्मे के लिए कांग्रेस का यह संघर्ष निरंतर जारी रहेगा।
पूरा विवाद क्या है?
कांग्रेस के अनुसार, उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित रामलीला मैदान में गत 8 अगस्त को मल्लिकार्जुन खरगे की एक विशाल जनसभा आयोजित की गई थी। इसके बाद 11 अगस्त को कुछ लोगों द्वारा उसी मैदान में कथित तौर पर 'शुद्धिकरण यज्ञ' किए जाने का मामला सामने आया, जिससे राजनीतिक गलियारों में भारी विवाद छिड़ गया। कांग्रेस पार्टी ने इस घटना को सीधे तौर पर दलित सम्मान और अपमान से जोड़ते हुए भाजपा को आड़े हाथों लिया।
इसी कड़ी में राहुल गांधी ने 29 अगस्त को नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस घटना की तीव्र भर्त्सना की थी और इसमें संलिप्त लोगों के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट (SC-ST Act) के तहत एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी। पार्टी का यह भी कहना है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी संसद के भीतर इस घटना का उल्लेख करते हुए इसे छुआछूत की भावना से प्रेरित और अपनी व्यक्तिगत पीड़ा करार दिया था।
राहुल गांधी के खिलाफ क्यों दर्ज हुई एफआईआर?
पुलिस सूत्रों के अनुसार, हल्द्वानी निवासी अमित कुमार नामक व्यक्ति की औपचारिक शिकायत के आधार पर राहुल गांधी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि कांग्रेस नेता ने एक सामान्य धार्मिक अनुष्ठान को जानबूझकर 'जातिवादी रंग' दिया, जिससे वाल्मीकि समाज और अन्य लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। शिकायतकर्ता ने खुद को अनुसूचित जाति समुदाय से संबंधित बताया और दावा किया कि उस अनुष्ठान में विभिन्न वर्गों के लोग शामिल हुए थे, और उसका खरगे की जाति या किसी अपमान से कोई दूर-दूर तक वास्ता नहीं था।
पुलिस ने इस शिकायत पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की उन धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है, जो विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य या दुश्मनी को बढ़ावा देने और धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर ठेस पहुँचाने से जुड़ी हैं। इसके अलावा मामले में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की सुसंगत धाराएं भी जोड़ी गई हैं।
भाजपा का पक्ष और अन्य प्रतिक्रियाएं
इस पूरे घटनाक्रम पर पलटवार करते हुए भाजपा ने कांग्रेस के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था। भगवा दल का दावा था कि खरगे की सभा के बाद रामलीला मैदान में काफी गंदगी छोड़ दी गई थी और वहां कुछ धार्मिक स्थलों व भावनाओं के प्रतिकूल अनुचित नारे लगाए गए थे, जिसके कारण स्थानीय लोगों में रोष था। इसी पृष्ठभूमि में भाजपा ने उस कथित शुद्धिकरण कार्यक्रम का बचाव किया था।
विवाद के तूल पकड़ने पर कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की थी और इस पूरी घटना को एक शर्मनाक मानसिकता का प्रतीक बताया था।

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