भोपाल: मध्य प्रदेश की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर घमासान बेहद तेज हो गया है। कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद से सियासी पारा पूरी तरह गरमाया हुआ है। इस फैसले के विरोध में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मंगलवार रात राज्य निर्वाचन आयोग के मुख्य द्वार के सामने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। इस प्रदर्शन में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, खुद प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन, प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह समेत पार्टी के तमाम बड़े विधायक और पदाधिकारी रातभर डटे रहे।
लोकतांत्रिक व संवैधानिक प्रक्रियाओं के उल्लंघन का आरोप
मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होते ही कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र पर हमला करार दिया और सड़कों पर उतर आई। निर्वाचन आयोग के दफ्तर के बाहर धरने पर बैठे कांग्रेस नेताओं ने भाजपा और चुनाव आयोग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कांग्रेस का सीधा आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में संवैधानिक नियमों की धज्जियां उड़ाई गई हैं। नेताओं का कहना है कि जिस राज्यसभा सीट पर कांग्रेस की जीत पूरी तरह तय थी, उसे हासिल करने के लिए सत्ता का दुरुपयोग कर सोची-समझी रणनीति के तहत परिणाम को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। कांग्रेस ने साफ किया है कि यह लड़ाई अब सिर्फ एक सीट की नहीं, बल्कि संविधान को बचाने की है, जिसे वे सड़क से लेकर अदालत तक लड़ेंगे।
नामांकन रद्द होने की असली वजह
मीनाक्षी नटराजन की उम्मीदवारी निरस्त होने के पीछे मुख्य कारण नामांकन पत्र में जानकारी छिपाने को बताया जा रहा है। विरोधियों का दावा है कि नटराजन ने हैदराबाद में दर्ज एक मामले की जानकारी अपने हलफनामे में नहीं दी थी। दूसरी तरफ, कांग्रेस ने इस आरोप को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि उन्हें उस मामले में केवल एक नोटिस मिला था, कोई केस दर्ज नहीं था। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इसे भाजपा की साजिश बताते हुए कहा कि मध्य प्रदेश के लोकतांत्रिक इतिहास को कलंकित किया गया है और पार्टी इस अन्याय के खिलाफ पीछे हटने वाली नहीं है।
संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह लड़ाई देश की संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को बचाने की है, क्योंकि भाजपा लगातार इन संस्थाओं को कमजोर कर रही है। वहीं, मीनाक्षी नटराजन ने भी पूरी चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने "लोकतंत्र बचाओ", "संविधान बचाओ" और "चुनाव आयोग निष्पक्षता दिखाओ" जैसे नारे लगाए। रात गहराने के साथ ही विरोध का अनोखा रूप देखने को मिला, जब मांगें पूरी न होने पर प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार समेत कई विधायक चुनाव आयोग के गेट के सामने ही जमीन पर सो गए। जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया पर साफ संदेश दिया कि जब तक चुनाव आयोग उनकी बात नहीं सुनता, उनका यह धरना अनिश्चितकाल के लिए जारी रहेगा।

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