मानसून की सुस्ती से बढ़ी चिंता, 253 बांध खाली; क्या अगस्त देगा राहत?

जयपुर: राजस्थान में इस बार मानसून का पहला पखवाड़ा उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाया है। प्रदेश में 2 जुलाई को मानसून के प्रवेश के बाद से अब तक औसत से कम बारिश दर्ज की गई है, जिससे किसानों और आम जनजीवन की चिंताएं बढ़ने लगी हैं। मौसम विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में सामान्य वर्षा स्तर के मुकाबले वास्तविक बारिश का ग्राफ नीचे रहा है, जिससे प्रदेश के जलाशयों और बांधों में पानी का संतोषजनक संचय नहीं हो सका है।

बांधों की चिंताजनक स्थिति और खाली पड़े जलाशय

कमजोर मानसूनी गतिविधियों का सीधा असर राज्य के जल स्रोतों पर साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। पिछले वर्ष की तुलना में इस साल बांधों का जलभराव काफी कम दर्ज किया गया है। प्रदेश के सैकड़ों बांध या तो आंशिक रूप से भरे हैं या पूरी तरह से सूखे पड़े हैं, जिससे आने वाले दिनों में सिंचाई और पेयजल आपूर्ति को लेकर गंभीर संकट की स्थिति बन सकती है। जल संसाधन विभाग के अनुसार पिछले साल के मुकाबले इस अवधि में बांधों में पानी का कुल भंडारण काफी नीचे आ गया है।

जुलाई में मानसून कमजोर रहने के मुख्य कारण

इस वर्ष जुलाई के महीने में मानसून के कमजोर पड़ने के पीछे मुख्य रूप से मानसूनी ब्रेक यानी लंबे शुष्क दौर और मौसमी हवाओं के असमान वितरण को जिम्मेदार माना जा रहा है। मानसून ट्रफ के अपनी सामान्य स्थिति से उत्तर की ओर खिसक जाने के कारण प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बारिश का दौर थम सा गया। इसके अलावा मौसमी तंत्र में आए बदलावों और भौगोलिक प्रभावों के चलते भी जुलाई का महीना पानी के लिहाज से काफी निराशाजनक रहा है।

अब अगस्त के मानसून पर टिकी हैं सारी उम्मीदें

कृषि और जल विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून का आगामी चरण बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है। यदि अगस्त के महीने में अच्छी और झमाझम बारिश होती है, तो जलाशयों के जलस्तर में तेजी से सुधार हो सकता है जैसा कि पिछले वर्षों में भी देखा जा चुका है। हालांकि, यदि आने वाले दिनों में भी वर्षा की स्थिति ऐसी ही कमजोर बनी रही, तो प्रदेश के कई जिलों में जल संकट और गहरा सकता है, जिससे पूरी तरह से अगस्त के मौसम पर नजरें टिकी हुई हैं।