इस्लामाबाद। गंभीर विदेशी मुद्रा संकट की मार झेल रहा पाकिस्तान अब अपने विदेशी मुद्रा भंडार को सहारा देने के लिए कृषि निर्यात का सहारा ले रहा है। कुवैत को तेल के बदले सैन्य सेवाएँ देने की खबरों के बाद, इस्लामाबाद ने अब चीन के साथ एक बड़ा व्यापारिक समझौता किया है। इस नए करार के तहत पाकिस्तान चालू वर्ष में चीन के ग्वांगझू और शेनझेन प्रांतों में 60 हजार टन चावल की आपूर्ति करेगा। इस सौदे के जरिए पाकिस्तान को लगभग 300 से 400 मिलियन डॉलर (करीब 3 to 4 अरब डॉलर) के निर्यात ऑर्डर मिलने की उम्मीद है।
चीन में बढ़ा पाकिस्तानी चावल का कारोबार, 3 गुना उछाल का अनुमान
राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ऑफ पाकिस्तान (REAP) का 20 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल व्यापारिक वार्ताओं को अंतिम रूप देने के लिए 28 जुलाई तक चीन के दौरे पर है। आरईएपी के उपाध्यक्ष जावेद जिलानी ने बताया कि चीन के बाजारों में बासमती और गैर-बासमती चावल की मांग तेजी से बढ़ी है। बीते वित्तीय वर्ष में पाकिस्तान ने चीन को 124 मिलियन डॉलर का चावल बेचा था, लेकिन इस नए समझौते के बाद यह आंकड़ा करीब तीन गुना बढ़कर 300 से 400 मिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है।
डॉलर भंडार मजबूत करने और मक्का निर्यात की नई रणनीति
विदेशी मुद्रा की किल्लत से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए टेक्सटाइल के बाद चावल ही सबसे बड़ा विदेशी मुद्रा अर्जक स्रोत है। आर्थिक जानकारों के मुताबिक, पाकिस्तान में चावल का उत्पादन घरेलू जरूरत से ज्यादा होता है, इसलिए वह इसका इस्तेमाल डॉलर भंडार बढ़ाने के लिए कर रहा है। इसके साथ ही, पाकिस्तान अब सिर्फ चावल तक सीमित न रहकर चीन को मक्का (कॉर्न) निर्यात करने की भी तैयारी कर रहा है, जिसके लिए चीनी अधिकारियों ने पाकिस्तानी कारोबारियों का पंजीकरण शुरू कर दिया है।

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