September 13, 2026

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, युवक की 3 माह की नजरबंदी रद्द

रायपुर|छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने एक अहम फैसले में बिना ठोस साक्ष्य के पारित नजरबंदी (डिटेंशन) आदेश को रद्द कर दिया. कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि केवल अंदाजे और सामान्य आरोपों के आधार पर किसी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता नहीं छीनी जा सकती. यह आदेश मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने पारित किया|

क्या है मामला?

याचिकाकर्ता चूड़ामणि साहू निवासी बाराद्वार जिला-सक्ती, जो पेशे से ऑटो चालक है. उसे साल 2020 में एनडीपीएस एक्ट के तहत सक्ती पुलिस ने गिरफ्तार किया गया था. 2021 में सजा होने के बाद उसने हाई कोर्ट में अपील दायर की, जहां से उसे 2022 में जमानत मिल गई|वह फिर ऑटो चलाकर जीवनयापन कर रहा था, इस बीच 2024 में पुलिस और प्रशासन ने उसे आदतन अपराधी बताते हुए पीआईटी एनडीपीसी एक्ट के तहत 3 माह के लिए जिला जेल सक्ती में नजरबंद करने का आदेश जारी कर दिया|