मेवाड़ में गूंजे शौर्य के जयकारे, महाराणा प्रताप जयंती पर मोती मगरी में भारी भीड़

उदयपुर। भारतीय पारंपरिक पंचांग के मुताबिक ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के पावन अवसर पर मेवाड़ की माटी के महान सपूत और वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की 486वीं जयंती देशप्रेम और अगाध श्रद्धा के भाव के साथ मनाई जा रही है। इस गौरवमयी दिवस पर सबसे मुख्य और भव्य समारोह राजस्थान के उदयपुर में खूबसूरत फतहसागर झील के तट पर स्थित ऐतिहासिक मोती मगरी स्मारक पर आयोजित किया गया। सूर्य की पहली किरण के साथ ही हजारों की तादाद में स्थानीय नागरिकों, पर्यटकों और राष्ट्रभक्तों का हुजूम इस पावन स्मारक पर जुटना शुरू हो गया, जहां सभी ने इस अदम्य साहसी योद्धा की प्रतिमा के समक्ष शीश नवाकर उन्हें अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

श्रद्धा, भक्ति और राष्ट्रप्रेम का त्रिवेणी संगम और महापुरुष का स्मरण

मोती मगरी परिसर में आयोजित मुख्य समारोह के दौरान अद्भुत आध्यात्मिक श्रद्धा, अटूट भक्ति और हिलोरे मारती देशभक्ति का एक अनुपम वातावरण देखने को मिला। कार्यक्रम में उपस्थित जनसैलाब ने राष्ट्रगौरव महाराणा प्रताप के तैलचित्र और भव्य प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और मुगलों के खिलाफ मातृभूमि की रक्षा के लिए उनके द्वारा किए गए ऐतिहासिक संघर्ष को याद किया। वक्ताओं ने उनके अद्वितीय साहस, स्वाभिमान और स्वतंत्रता के प्रति उनके अडिग संकल्प का स्मरण करते हुए नई पीढ़ी को उनके पदचिह्नों पर चलने का आह्वान किया।

शौर्य और आत्मसम्मान के वैश्विक प्रतीक तथा युवाओं के प्रेरणास्रोत

प्रशासनिक और सामाजिक स्तर पर आयोजित इस संगोष्ठी में वक्ताओं ने रेखांकित किया कि महाराणा प्रताप महज मेवाड़ या राजस्थान की सीमाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन्हें संपूर्ण राष्ट्र और वैश्विक स्तर पर अदम्य वीरता, राष्ट्रवाद और आत्मसम्मान के सबसे बड़े जीवंत प्रतीक के रूप में पूजा जाता है। उनके जीवन के त्याग, चेतक की स्वामीभक्ति और घास की रोटी खाकर भी स्वाधीनता की अलख जगाए रखने की प्रेरक कहानियां आज भी देश के करोड़ों युवाओं की रगों में देशभक्ति का नया संचार करती हैं और उन्हें विषम परिस्थितियों में भी न झुकने की प्रेरणा देती हैं।

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की प्रस्तुतियां और दिनभर गूंजेंगे शौर्य गीत

प्रताप जयंती के इस पावन उत्सव को भव्य रूप देने के लिए स्थानीय जिला प्रशासन, पर्यटन विभाग और विभिन्न सामाजिक व राजपूत संगठनों के आपसी तालमेल से कई गरिमामयी आयोजन सुनिश्चित किए गए हैं। इन कार्यक्रमों में स्थानीय कलाकारों द्वारा मेवाड़ी लोक संस्कृति की प्रस्तुतियां, स्कूली बच्चों द्वारा देशभक्ति से ओत-प्रोत नाटक और वीर रस के कवियों द्वारा शौर्य गीतों का पाठ मुख्य आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। फिलहाल झीलों की नगरी उदयपुर में प्रताप जयंती का यह पुनीत महाउत्सव चहुंओर पूरे हर्षोल्लास, उमंग और पूज्य भाव के साथ परवान पर है और देर शाम तक शहर के विभिन्न चौराहों और संस्थाओं में विविध कार्यक्रमों के अनवरत जारी रहने की संभावना जताई गई है।