नई दिल्ली | दिल्ली की 135 साल पुरानी सेंट्रल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी (CSL) को उसकी मौजूदा जगह से हटाकर कहीं और ले जाने की तैयारी चल रही है। चिंता इस बात को लेकर है कि नए सेंट्रल विस्टा प्लान में इस ऐतिहासिक लाइब्रेरी के लिए कोई स्पष्ट जगह दिखाई नहीं दे रही है। इस महत्वपूर्ण मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है, जिसकी सुनवाई जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की बेंच द्वारा की जाएगी। इस ऐतिहासिक लाइब्रेरी में 8.5 लाख से अधिक दुर्लभ किताबें और महत्वपूर्ण दस्तावेज मौजूद हैं।
नई जगह की तलाश और किताबों को सुरक्षित रखने की बड़ी चुनौती
सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, लाइब्रेरी को मौजूदा स्थान से हटाकर अन्यत्र शिफ्ट करने की प्रक्रिया चल रही है, हालांकि इसके लिए अभी तक कोई उपयुक्त जगह पूरी तरह तय नहीं हो पाई है। केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) और केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) इसके लिए लगातार नई जगह की तलाश कर रहे हैं। इतनी भारी मात्रा में मौजूद किताबों और ऐतिहासिक रिकॉर्ड को पूरी तरह सुरक्षित तरीके से दूसरी जगह स्थानांतरित करना सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।
लाखों किताबें सिर्फ पन्ने नहीं, बल्कि हमारे देश के इतिहास का अनमोल खजाना हैं
सेंट्रल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी की उम्र लगभग 135 वर्ष है। इतने लंबे समयांतर में यहां किताबों के साथ-साथ कई अनमोल दस्तावेज और दुर्लभ संदर्भ सामग्री जमा हुई है। ऐसे में इस विशाल संस्थान को महज एक सामान्य लाइब्रेरी की तरह दूसरी जगह ले जाना आसान कार्य नहीं है। लाखों किताबों को सुरक्षित रखना, उनका व्यवस्थित रिकॉर्ड बनाए रखना और शोधकर्ताओं व पाठकों की पहुंच को पूर्ववत बनाए रखना एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है।
सेंट्रल विस्टा परियोजना में जगह न मिलने पर उठे गंभीर सवाल
सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत दिल्ली के सरकारी भवनों और प्रशासनिक कार्यालयों के पूरे इलाके को नए सिरे से विकसित किया जा रहा है। इसी बड़े बदलाव के बीच CSL के भविष्य को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मुख्य चिंता यह है कि इतनी पुरानी और देश की धरोहर जैसी महत्वपूर्ण लाइब्रेरी को इस नई योजना में उचित स्थान क्यों नहीं मिल पाया और यदि इसे हटाया जाता है, तो इसकी नई व्यवस्था किस प्रकार की होगी।
सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान से जगी उम्मीद और विरासत का भविष्य
सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस मामले में स्वतः संज्ञान लिए जाने से यह साफ हो गया है कि इस लाइब्रेरी के भविष्य को लेकर उठ रहे सवालों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इस ऐतिहासिक लाइब्रेरी को लेकर असली चिंता सिर्फ इमारत की नहीं, बल्कि उस विशाल ज्ञान और सांस्कृतिक विरासत की है जो इन लाखों किताबों में कैद है। अब सभी की निगाहें अदालत की सुनवाई पर टिकी हुई हैं, जहां इस ऐतिहासिक लाइब्रेरी के भविष्य को लेकर स्थिति और अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

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