तेहरान। अमेरिका और इजराइल द्वारा 28 फरवरी को किए गए हमलों के बाद ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) को युद्ध क्षेत्र घोषित किए जाने से वैश्विक समुद्री परिवहन संकट में आ गया है। इस भू-राजनीतिक संघर्ष का सीधा असर मर्चेंट नेवी में काम कर रहे भारतीय नाविकों पर पड़ा है, जिनकी वैश्विक समुद्री कार्यबल में 12.2 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
युद्ध क्षेत्र बना रणनीतिक जलमार्ग
पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव और सैन्य कार्रवाइयों के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों पर हमले और जब्ती का खतरा मंडरा रहा है। वैश्विक ऊर्जा और व्यापार आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले इस समुद्री रास्ते पर सैन्य गतिविधियों ने वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही को बेहद जोखिम भरा बना दिया है।
भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर संकट
अंतरराष्ट्रीय मर्चेंट नेवी में बड़ी संख्या में तैनात भारतीय चालक दल के सदस्य इस वक्त सीधे खतरे के क्षेत्र (रेड जोन) में फंस गए हैं। जहाजों पर लगातार बढ़ते हमलों के बीच जहाजरानी कंपनियों और भारतीय नाविकों के परिवारों में उनकी सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता उत्पन्न हो गई है।

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