क्रॉस वोटिंग पर भाजपा सख्त, संदिग्ध MLAs की रिपोर्ट शीर्ष नेतृत्व के पास

नई दिल्ली: कर्नाटक विधान परिषद (MLC) चुनाव के नतीजों के बाद पार्टी लाइन से अलग हटकर क्रॉस-वोटिंग करने वाले बागी विधायकों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपना रुख बेहद सख्त कर लिया है। कर्नाटक भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने मंगलवार को नई दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय नेताओं से मुलाकात की और चुनाव के दौरान हुए पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी दी।

शुरुआती अटकलों में कहा जा रहा था कि केंद्रीय नेतृत्व ने राज्य के इन दोनों बड़े नेताओं को दिल्ली तलब किया है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक विजयेंद्र और अशोक ने खुद दिल्ली आकर राष्ट्रीय अध्यक्ष के सामने स्थिति स्पष्ट करने की पेशकश की थी।

गुप्त मतदान बना भाजपा के लिए बड़ी चुनौती

भाजपा के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती उन 'विभीषणों' (क्रॉस-वोटिंग करने वाले विधायकों) की सटीक पहचान करना है जिन्होंने जेडीएस-भाजपा गठबंधन के बजाय कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया। राज्यसभा चुनाव के विपरीत, जहां विधायकों को पार्टी के अधिकृत एजेंट को अपना मत दिखाना अनिवार्य होता है, विधान परिषद का चुनाव पूरी तरह गुप्त मतदान (Secret Ballot) के जरिए होता है।

पार्टी सूत्रों का कहना है कि चूंकि किसी को भी अपना वोट दिखाने की जरूरत नहीं थी, इसलिए क्रॉस-वोटिंग करने वाले सटीक विधायकों को पकड़ना घास के ढेर में सुई ढूंढने जैसा बेहद पेचीदा काम बन गया है। हालांकि, शुरुआती जांच के आधार पर करीब एक दर्जन संदिग्ध विधायकों की एक शॉर्टलिस्ट तैयार की गई है, जिनमें से 3 से 4 विधायकों के क्रॉस-वोट करने की प्रबल आशंका है।

कहां गड़बड़ाया NDA का गणित?

16 जून को घोषित हुए नतीजों के बाद भाजपा के आंतरिक समीकरणों में बड़ी कमियां उजागर हुईं:

  • एनडीए (NDA) के 11 विधायकों ने गठबंधन के सहयोगी जेडीएस (JDS) उम्मीदवार गोविंदराजू के पक्ष में मतदान नहीं किया।

  • भाजपा के 4 वोट अप्रभावी रहे।

  • एक वोट को तकनीकी कमियों के चलते पूरी तरह अमान्य (Invalide) घोषित कर दिया गया।

  • भाजपा विधायकों द्वारा कम से कम 3 मामलों में सीधी क्रॉस-वोटिंग की पुष्टि हो चुकी है।

सीटी रवि कमेटी 25 जून को सौंपेगी रिपोर्ट

चुनाव के तुरंत बाद भाजपा ने वरिष्ठ नेता सीटी रवि के नेतृत्व में एक तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया था। इस समिति का मुख्य काम उन 3-4 विधायकों की पहचान करना है जिन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार को जिताने में पर्दे के पीछे से मदद की।

यह कमेटी 25 जून को अपनी पहली विस्तृत रिपोर्ट प्रदेश अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र को सौंपने जा रही है। दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए विपक्ष के नेता आर. अशोक ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि रिपोर्ट में जिन भी विधायकों के नाम सामने आएंगे, उनके खिलाफ पार्टी विरोधी गतिविधियों के तहत कठोरतम दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।