फूड स्टार्टअप्स के लिए बड़ा मौका: योगी सरकार देगी 50 लाख तक का अनुदान, 75 जिलों के 208 शाकाहारी व्यंजन शॉर्टलिस्ट

लखनऊ | उत्तर प्रदेश के पारंपरिक और प्रसिद्ध स्वादों को वैश्विक पटल पर नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने ‘एक जनपद एक व्यंजन’ (ओडीओसी) नीति का विस्तृत खाका प्रस्तुत किया है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) विभाग द्वारा इस योजना के सुचारू संचालन के लिए आधिकारिक शासनादेश जारी कर दिया गया है। इस नई पहल के अंतर्गत स्थानीय व्यंजनों के उत्पादन, प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग), पैकेजिंग और ब्रांडिंग से जुड़े व्यवसायों को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने के लिए वित्तीय और प्रशासनिक सहयोग प्रदान किया जाएगा, जिससे जिला स्तर के खाद्य व्यवसायियों के लिए बड़े ब्रांड बनने के मार्ग प्रशस्त होंगे।

नई इकाइयों की स्थापना और वित्तीय पैकेज का प्रावधान

शासनादेश के अनुसार, ओडीओसी योजना के तहत व्यंजनों से संबंधित नई इकाइयों को शुरू करने, उनके विस्तार अथवा विविधीकरण के लिए वाणिज्यिक बैंकों के माध्यम से ऋण सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। परियोजना की कुल लागत के आधार पर सरकार द्वारा अधिकतम 50 लाख रुपये तक की मार्जिन मनी सहायता दी जाएगी, जो इकाई के दो वर्ष तक सफलतापूर्वक संचालित होने के बाद अनुदान (सब्सिडी) में बदल दी जाएगी। इसमें सामान्य वर्ग के आवेदकों को कुल लागत का 10 प्रतिशत, जबकि आरक्षित वर्ग, महिलाओं, अल्पसंख्यकों और दिव्यांगों को केवल 5 प्रतिशत का अंशदान देना होगा। इसके अतिरिक्त स्वचालित मशीनों, पैकेजिंग इकाइयों, कोल्ड चेन, मिनी कोल्ड रूम, फूड टेस्टिंग लैब और क्लाउड किचन जैसी आधुनिक सुविधाओं के लिए भी प्रतिवर्ष विभिन्न मदों में वित्तीय सहायता का प्रावधान किया गया है।

बाजार प्रोत्साहन, डिजिटल ब्रांडिंग और राष्ट्रीय मेलों में सहायता

स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने के लिए एक विशेष विपणन प्रोत्साहन नीति तैयार की गई है। इसके तहत राज्य के भीतर आयोजित होने वाले व्यापार मेलों में स्टॉल के किराये और माल ढुलाई पर 75 प्रतिशत की छूट मिलेगी, जबकि राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों में शामिल होने के लिए हवाई यात्रा, स्टॉल शुल्क और माल ढुलाई पर भारी सब्सिडी दी जाएगी; विदेशों में आयोजित होने वाले मेलों के स्टॉल शुल्क हेतु अधिकतम 3.25 लाख रुपये की सहायता तय की गई है। इसके साथ ही, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जुड़ने, जीआई टैगिंग, एफएसएसएआई (FSSAI) व आईएसओ (ISO) प्रमाणीकरण तथा पर्यावरण अनुकूल पैकेजिंग के लिए प्रति इकाई सालाना 10 लाख रुपये तक की मदद दी जाएगी। साथ ही पर्यटन विभाग के समन्वय से ‘‘स्वाद यूपी का’’ डिजिटल अभियान भी चलाया जाएगा।

प्रतिष्ठित संस्थानों से तकनीकी प्रशिक्षण और त्रिस्तरीय निगरानी व्यवस्था

योजना से जुड़े उद्यमियों को खाद्य सुरक्षा, स्वच्छता, गुणवत्ता नियंत्रण और पैकेजिंग की आधुनिक तकनीकों से लैस करने के लिए सीएफटीआरआई (CFTRI), निफ्टेम (NIFTEM) और भारतीय पैकेजिंग संस्थान जैसे देश के शीर्ष संस्थानों के माध्यम से ऑनलाइन व ऑफलाइन प्रशिक्षण दिलाया जाएगा। इस पूरी व्यवस्था को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए तीन स्तरों पर कमेटियां गठित की गई हैं। जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली जिला स्तरीय समिति स्थानीय प्रस्तावों को मंजूरी देगी, आयुक्त एवं निदेशक उद्योग के नेतृत्व वाली राज्य स्तरीय स्क्रीनिंग समिति आवेदनों का परीक्षण करेगी, और एमएसएमई विभाग के प्रमुख सचिव की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय समिति नीतिगत फैसलों व योजना की प्रगति की समीक्षा करेगी।