इंदौर: लंबे समय से आबादी भूमि पर काबिज किसानों और ग्रामीणों के लिए प्रदेश सरकार ने एक राहत भरी पहल की है। अब आबादी ज़मीन पर रह रहे लोगों को अपनी संपत्ति का कानूनी मालिकाना हक आसानी से मिल सकेगा। स्वामित्व योजना के अंतर्गत आबादी भूमि के दस्तावेजों का पंजीयन पूरी तरह से मुफ्त किया जाएगा। इंदौर जिले में इस योजना के माध्यम से लगभग 1,34,556 दस्तावेजों की रजिस्ट्री की जाएगी, जिसके लिए सरकार ने स्टांप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन शुल्क और पंचायत उपकर को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है।
जिले के 522 गांव योजना में शामिल
इंदौर जिले के कुल 680 गांवों में से 522 गांवों को इस विशेष योजना के तहत चुना गया है। शेष गांवों में या तो आबादी भूमि उपलब्ध नहीं है या फिर वहाँ वर्तमान में बसाहट नहीं है। योजना की खास बात यह है कि इसके तहत सरकारी और निजी दोनों प्रकार की भूमियों का पंजीयन किया जाएगा। बड़े पैमाने पर होने वाली रजिस्ट्रियों को समय पर पूरा करने के लिए सरकार ने उप-पंजीयकों के अलावा तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को भी रजिस्ट्री निष्पादित करने के अधिकार सौंपे हैं।
541 गांवों में प्रक्रिया पूरी, ड्रोन से हुआ सर्वे
जिले में योजना के क्रियान्वयन की स्थिति काफी बेहतर है। अब तक 541 गांवों में आबादी भूमि से जुड़ी सभी औपचारिकताएं संपन्न हो चुकी हैं, जबकि केवल 8 गांवों में कार्य प्रगति पर है। इनमें से 5 गांवों में आरओआर (Record of Rights) और 3 गांवों में ग्राउंड ट्रूथिंग की प्रक्रिया शेष है। उल्लेखनीय है कि इंदौर में आबादी भूमि और गांवों के सटीक नक्शे तैयार करने के लिए आधुनिक ड्रोन सर्वे की मदद ली गई है, जिसके बाद ग्राउंड ट्रूथिंग और रिकॉर्ड ऑफ राइट्स की कार्रवाई पूरी कर पात्र हितग्राहियों को स्वामित्व अभिलेख वितरित किए जा चुके हैं।
संपत्ति का वैध अधिकार और वित्तीय मदद के खुलेंगे रास्ते
स्वामित्व योजना के माध्यम से मिलने वाले इस कानूनी हक से ग्रामीणों को कई प्रत्यक्ष लाभ होंगे। वैध दस्तावेज हाथ में होने से ग्रामीण न केवल अपनी भूमि को कानूनी रूप से सुरक्षित कर सकेंगे, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर बैंकों से आसानी से लोन भी प्राप्त कर सकेंगे। चाहे मकान का निर्माण कराना हो या किसी व्यवसाय का विस्तार, अब ग्रामीणों को आर्थिक गतिविधियों के लिए वित्तीय सहायता प्राप्त करने में कोई अड़चन नहीं आएगी।

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