भाई दूज का पर्व कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है. इस दिन बहन अपने भाई का मंगल तिलक करके उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैं. भैया दूज के पर्व को लेकर अक्सर मन में कई सवाल आते हैं कि यह पर्व कैसे शुरू हुआ आदि? पौराणिक कथाओं के अनुसार यमराज शनिदेव के बड़े भाई हैं, जिनके पिता भगवान सूर्य देव हैं. सूर्य देव की दो पुत्री हैं. यमुना और भद्रा. यमुना का उद्गम स्थल उत्तरकाशी के यमुनोत्री से माना जाता है. वहीं उत्तरकाशी के नचिकेता ताल में यमराज की गुफा भी है, जिसका रास्ता पाताल लोक तक जाने की मान्यता है. मान्यता है कि यमराज हर साल भैया दूज के दिन अपनी बहन यमुना से मिलकर यह पर्व मनाते हैं और उसके बाद वापस लौट जाते हैं. भैया दूज के दिन अपने भाई का मंगल तिलक किस समय करें कि लाभ हो? चलिए जानते हैं…
भैया दूज का पर्व रक्षाबंधन के जैसे ही मनाया जाता है. यह पर्व दीपावली के दो दिन बाद मनाने का विधान बताया गया है. वैदिक पंचांग के अनुसार साल 2025 में भैया दूज का पर्व 23 अक्टूबर बृहस्पतिवार के दिन मनाया जाएगा. ठाकुर पंचांग के अनुसार कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि की शुरुआत 22 अक्टूबर बुधवार की रात 8:16 से शुरू होगी, जो 23 अक्टूबर की रात 10: 46 तक रहेगी. उदया तिथि के अनुसार 23 अक्टूबर को ही यह पर्व मनाने पर इसका लाभ मिलेगा.
ज्योतिषीय गणना के अनुसार भैया दूज के दिन शुभ मुहूर्त में ही भाई का मंगल तिलक करने का विधान बताया गया है. भैया दूज के दिन खास विधि से ही भाई का तिलक करने पर लाभ मिलता है. वह बताते हैं कि तिलक करने से पहले आटे से एक चौक या रंगोली बनाएं इसके बाद अपने भाई को उस चौक के ऊपर ऐसे खड़ा करें कि उनका मुख पूर्व दिशा की तरफ हो जबकि पीठ पश्चिम दिशा की तरफ हो. इस दिन तिलक करने का शुभ मुहूर्त दोपहर 1:13 से 3:28 तक रहेगा. इस 2 घंटे 15 मिनट के समय में ही अपने भाई का मंगल तिलक करके उनकी दीर्घायु की कामना करें.

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