October 22, 2026

अमित शाह बोले- जवानों के बलिदान के बिना भारत की आज की तस्वीर अलग होती

नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर देश की रक्षा में अपने प्राण न्योछावर करने वाले अमर शहीद पुलिसकर्मियों को नमन किया। उन्होंने देश की संप्रभुता और सुरक्षा में जवानों के अद्वितीय योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि आज भारत वैश्विक पटल पर जिस गौरवशाली मुकाम पर स्थापित है, उसके पीछे हमारे वीर जवानों का सर्वोच्च बलिदान है। गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि यदि इन बहादुर जवानों ने कठिन परिस्थितियों में देश की रक्षा न की होती, तो भारत की वर्तमान स्थिति की कल्पना करना भी असंभव होता।

आजादी से लेकर अब तक के अमर बलिदानियों को नमन

गृह मंत्री ने अपने संबोधन में आजादी के बाद से लेकर अब तक देश सेवा में अपने प्राणों की आहुति देने वाले सभी जांबाज पुलिसकर्मियों को याद किया। उन्होंने कहा कि इन जवानों ने अपनी जान की परवाह न करते हुए नागरिकों और राष्ट्र की सुरक्षा को सर्वोपरि रखा। विषम से विषम परिस्थितियों में भी वे अपनी ड्यूटी पर डटे रहे। गृह मंत्री ने विश्वास जताया कि इन पुलिसकर्मियों की अमर कुर्बानी को यह राष्ट्र कभी नहीं भूल सकता और उनका योगदान इतिहास में हमेशा स्वर्ण अक्षरों में दर्ज रहेगा।

भारत की प्रगति और जवानों का अतुलनीय योगदान

अमित शाह ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद से देश ने हर क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है और आज पूरी दुनिया भारत को सम्मान की दृष्टि से देखती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस कामयाबी की मजबूत नींव में उन जवानों का त्याग है जिन्होंने देश को अंदरूनी और बाहरी खतरों से सुरक्षित रखा। आज के सशक्त भारत के स्वरूप को समझने के लिए उन शहीदों के योगदान को स्मरण करना बेहद आवश्यक है, जिनके बलिदान ने राष्ट्र के विकास का मार्ग प्रशस्त किया।

सुरक्षा बल न होते तो स्थिति की कल्पना भी कठिन

गृह मंत्री ने कहा कि देश के आंतरिक तंत्र में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने से लेकर सीमाओं की चौकसी तक, जवानों ने हर मोर्चे पर अपनी जिम्मेदारी का निष्ठापूर्वक निर्वहन किया है। इस दौरान अनेक जवानों ने अपना कर्तव्य निभाते हुए वीरगति प्राप्त की। उन्होंने भावुक होकर कहा कि यदि इन वीरों और वीरांगनाओं ने आंतरिक सुरक्षा और सीमाओं की ढाल बनकर रक्षा न की होती, तो आज हम किस मोड़ पर होते, इसकी कल्पना करना भी कठिन है।

नक्सल हिंसा के आंकड़े और 2029 का लक्ष्य

गृह मंत्री ने आंकड़ों का उल्लेख करते हुए बताया कि देश में नक्सल हिंसा के कारण अब तक 13,700 से अधिक निर्दोष नागरिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी है, जबकि 3,600 से ज्यादा जवान शहीद हुए हैं। हालांकि, उन्होंने आश्वस्त किया कि जम्मू-कश्मीर, पूर्वोत्तर राज्यों और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा चुनौतियों पर काफी हद तक नियंत्रण पा लिया गया है। इसके साथ ही उन्होंने देश को 31 दिसंबर 2029 तक पूरी तरह से नशामुक्त बनाने के संकल्प को दोहराया और पुलिस तंत्र से नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ एकजुट होकर निर्णायक लड़ाई लड़ने का आह्वान किया।