लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव में जीत की हैट्रिक लगाने के उद्देश्य से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सीट बंटवारे के मामले में रणनीतिक लचीलापन अपनाने की तैयारी में है। विशेषकर पूर्वांचल क्षेत्र में, जहां विगत लोकसभा चुनाव के परिणामों ने पार्टी के लिए गंभीर संकेत दिए थे, वहां समीकरणों को पुनः अपने पक्ष में करने हेतु भाजपा क्षेत्रीय सहयोगियों की भूमिका को प्राथमिकता दे रही है। इस अंचल में प्रभावी पकड़ रखने वाले तीन प्रमुख दलों—अपना दल (एस), निषाद पार्टी और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के साथ तालमेल पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
पूर्वी उत्तर प्रदेश में जनाधार रखने वाले इन तीनों सहयोगी दलों को गठबंधन के अंतर्गत 50 से 55 सीटें आवंटित की जा सकती हैं। वहीं, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सहयोगी राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) को लगभग 20 सीटों के आसपास सहमत करने की योजना पर विचार चल रहा है।
पूर्वी उत्तर प्रदेश को लेकर रणनीतिक चिंताएं
चुनाव की दृष्टि से भाजपा के लिए मुख्य चिंता पूर्वी उत्तर प्रदेश का क्षेत्र है। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव की तुलना में 2022 में अपेक्षाकृत कमजोर प्रदर्शन के बाद, 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा-कांग्रेस गठबंधन ने इस क्षेत्र में बढ़त बनाई थी, जहां विपक्षी गठबंधन ने क्षेत्र की 27 में से 15 सीटों पर विजय प्राप्त की थी। अब पार्टी की रणनीति अपने तीन प्रमुख सहयोगियों के माध्यम से गैर-यादव अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में अपनी पकड़ पुनः सुदृढ़ करने की है। कुर्मी, निषाद और राजभर समुदायों में प्रभाव रखने वाले ये दल लगभग सौ सीटों पर चुनावी परिणामों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं।
सीटों के आवंटन हेतु सहयोगियों का कड़ा रुख
विगत विधानसभा चुनाव की तुलना में इस बार भाजपा के सहयोगी दलों की संख्या बढ़कर चार हो गई है। ऐसे में सभी दल सीट बंटवारे के दौरान अधिक से अधिक सीटों की दावेदारी प्रस्तुत करने की तैयारी में हैं। पूर्व में सपा गठबंधन का हिस्सा रहे रालोद और सुभासपा क्रमशः 33 और 18 सीटों पर अपनी दावेदारी जता रहे हैं। वहीं, पिछले चुनाव में 16 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली निषाद पार्टी 25 सीटों की मांग कर रही है, जबकि 17 सीटों पर मैदान में उतरी अपना दल (एस) भी इस बार अधिक सीटों की अपेक्षा रख रही है।
सहयोगियों की संख्या में वृद्धि के कारण इस बार भाजपा स्वयं लगभग 330 से 335 सीटों पर प्रत्याशी उतार सकती है। सीट बंटवारे को लेकर औपचारिक चर्चा आगामी नवरात्र पर्व के पश्चात प्रारंभ होने की संभावना है।

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