मुंबई। बॉलीवुड फिल्म ‘अकेली’ अपने रिलीज के तीन साल बाद भी महिला-केंद्रित हिंदी फिल्मों की प्रभावशाली कहानियों में शामिल की जाती है। अभिनेत्री नुसरत भरुचा की इस फिल्म की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि इसमें एक आम महिला को असाधारण परिस्थितियों के बीच संघर्ष करते हुए दिखाया गया।
नुसरत ने फिल्म में ज्योति नाम की भारतीय युवती की भूमिका निभाई थी, जो खुद को एक खतरनाक संघर्ष क्षेत्र में फंसा हुआ पाती है। इसके बाद शुरू होता है उसका ऐसा सफर, जिसमें डर, असुरक्षा, उम्मीद और जीवित बचने की इच्छा लगातार उसके सामने चुनौती बनकर आती है। ‘अकेली’ की कहानी को किसी पारंपरिक व्यावसायिक फॉर्मूले के आधार पर नहीं गढ़ा गया था। फिल्म की नायिका न तो कोई सुपरहीरो है और न ही ऐसी महिला जिसे हर परिस्थिति से आसानी से बाहर निकलते हुए दिखाया गया हो। ज्योति एक साधारण युवती है, जो अचानक ऐसी परिस्थितियों में फंस जाती है जिनके लिए वह मानसिक रूप से तैयार नहीं थी। इसके बावजूद वह परिस्थितियों के सामने घुटने नहीं टेकती। यही सामान्य होने के बावजूद असाधारण साहस दिखाने वाला पहलू किरदार को दर्शकों के करीब ले जाता है। नुसरत भरुचा ने ज्योति के किरदार को बेहद संवेदनशीलता के साथ निभाया। उनके अभिनय में डर और घबराहट के साथ-साथ उम्मीद और संघर्ष की भावना भी दिखाई दी।
फिल्म का अधिकांश भार उनके किरदार पर था और उन्होंने इसे संभालने के लिए भावनात्मक तथा शारीरिक स्तर पर काफी मेहनत की। ज्योति की परिस्थितियां लगातार बदलती हैं, लेकिन उसके भीतर किसी तरह जीवित रहने और सुरक्षित लौटने की इच्छा बनी रहती है। नुसरत ने इस मानसिक स्थिति को अपने अभिनय में प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। फिल्म की खासियत यह भी रही कि इसमें महिला पात्र को केवल पीड़िता बनाकर पेश नहीं किया गया। ज्योति कठिन परिस्थितियों में फंसती जरूर है, लेकिन कहानी आगे बढ़ने के साथ वह खुद फैसले लेती है और अपनी सुरक्षा के लिए संघर्ष करती है। उसका साहस किसी बड़े भाषण या असाधारण शक्ति से नहीं, बल्कि परिस्थितियों से लड़ने की उसकी इच्छा से सामने आता है। यही वजह है कि उसका संघर्ष कहानी को भावनात्मक रूप से मजबूत बनाता है।
‘अकेली’ ने नुसरत भरुचा की अभिनेत्री के रूप में अलग पहचान को भी मजबूत किया। इससे पहले वह ‘छोरी’ और ‘जनहित में जारी’ जैसी फिल्मों में महिला-केंद्रित और सामाजिक विषयों से जुड़ी भूमिकाएं निभा चुकी थीं। इन फिल्मों के जरिए उन्होंने यह दिखाया कि वह केवल पारंपरिक रोमांटिक या मनोरंजक भूमिकाओं तक सीमित नहीं हैं। ‘अकेली’ ने भी उनके अभिनय की रेंज और चुनौतीपूर्ण विषयों को स्वीकार करने की क्षमता को सामने रखा। फिल्म की कहानी एक महिला के संघर्ष के माध्यम से मानव अस्तित्व, साहस और उम्मीद जैसे विषयों को सामने लाती है। इसमें यह दिखाने की कोशिश की गई कि भयावह परिस्थितियों में फंसने के बाद भी इंसान के भीतर आगे बढ़ने की इच्छा समाप्त नहीं होती।

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