September 14, 2026

सरेंडर के बाद तरुण तेजपाल की नजरें सुप्रीम कोर्ट पर, 22 सितंबर को होगा बड़ा फैसला

मुंबई| दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराए गए तहलका पत्रिका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल ने मापुसा न्यायालय के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है। उच्चतम न्यायालय ने उन्हें तीन सप्ताह की समयावधि के भीतर सरेंडर करने और इसकी प्रमाणित पावती (सरेंडर सर्टिफिकेट) अदालत में प्रस्तुत करने का निर्देश जारी किया था। शीर्ष अदालत के इसी आदेश के अनुपालन में तेजपाल ने न्यायालय में आत्मसमर्पण की प्रक्रिया पूरी की।

10 वर्ष की सजा के विरुद्ध दायर याचिका पर सुनवाई का मार्ग प्रशस्त

उच्चतम न्यायालय ने बॉम्बे उच्च न्यायालय के उस निर्णय को चुनौती देने वाली तरुण तेजपाल की याचिका पर सुनवाई का मार्ग प्रशस्त कर दिया है, जिसमें उच्च न्यायालय ने उन्हें दुष्कर्म के मामले में दोषी करार देते हुए 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी। शीर्ष अदालत की पीठ ने संकेत दिया है कि नियत समयसीमा के भीतर आत्मसमर्पण का प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए जाने के उपरांत उनकी याचिका को 22 सितंबर को सुनवाई हेतु सूचीबद्ध किया जा सकता है।

आत्मसमर्पण का प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य

उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि अपील की आगे की सुनवाई के लिए तेजपाल द्वारा संबंधित अदालत के समक्ष सरेंडर का आधिकारिक प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना एक अनिवार्य शर्त है। यह दस्तावेज उनकी याचिका पर सुनवाई की अग्रिम प्रक्रिया के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

उच्च न्यायालय ने सुनाई थी 10 वर्ष की सजा

बॉम्बे उच्च न्यायालय ने दुष्कर्म प्रकरण में तरुण तेजपाल को दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष की सश्रम कैद की सजा सुनाई थी। इस निर्णय के विरुद्ध तेजपाल ने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था। अब आत्मसमर्पण आदेश का अनुपालन पूर्ण होने के पश्चात उनकी अपील पर आगे की वैधानिक सुनवाई होने की संभावना है।