लखनऊ| लखनऊ के मलिहाबाद इलाके में टैंकरों से ईंधन चोरी कर उसमें एथेनॉल और अन्य खतरनाक केमिकल मिलाने वाले एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है। मिलावटी तेल के खिलाफ पुलिस और प्रशासन की सतर्कता के बाद इस पूरे खेल को उजागर किया गया है। यह अवैध कारोबार मलिहाबाद के संन्यासी बाग क्षेत्र में धड़ल्ले से चल रहा था। क्राइम ब्रांच, आपूर्ति विभाग और आबकारी विभाग की एक संयुक्त टीम ने रविवार को मौके पर छापेमारी कर गिरोह के चार सदस्यों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
एडीसीपी क्राइम किरन यादव ने बताया कि पिछले कुछ समय से क्षेत्र में पेट्रोल और डीजल में मिलावट किए जाने की लगातार इनपुट मिल रहे थे। इस पर त्वरित कार्रवाई करते हुए 'ऑपरेशन एथेनॉल शील्ड' के तहत एक विशेष टीम का गठन किया गया। रविवार को सटीक सूचना पर संन्यासी बाग में दबिश दी गई, जहां मौके से एक टैंकर और एक अन्य गाड़ी बरामद हुई।
टर्मिनल से निकलते ही रास्ते में रुकता था टैंकर, मास्टर चाबी से खुलते थे लॉक
जांच में यह चौंकाने वाली बात सामने आई कि हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HP) के अमौसी स्थित टर्मिनल से निकला यह टैंकर विधान भवन मार्ग पर स्थित 'शुभम फिलिंग स्टेशन' के लिए रवाना हुआ था। लेकिन तय ठिकाने पर पहुंचने से पहले ही रास्ते में रोककर इससे अवैध रूप से पेट्रोल निकाला जा रहा था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए फौरन आपूर्ति और आबकारी विभाग के अधिकारियों को मौके पर बुलाया गया। छापेमारी के दौरान टीम को घटना स्थल से 7750 लीटर शुद्ध पेट्रोल, 400 लीटर डीजल, 23 प्लास्टिक की कैनों में रखा 1150 लीटर मिलावटी पेट्रोल, 64 कैनों में भरा 3200 लीटर सॉल्वेंट और लॉक्स को खोलने वाली मास्टर चाबी समेत कई उपकरण मिले। टैंकर के पाइप और दूसरे हिस्से की जांच करने पर 250 लीटर पेट्रोल और मिला, जिससे साफ था कि ईंधन निकालने का काम जारी था। परिसर में बने एक मकान से करीब एक हजार गैलन भी मिले हैं, जिनमें मिश्रित ईंधन, एथेनॉल और सॉल्वेंट केमिकल स्टोर किया गया था।
75 रुपये लीटर में बिकता था चोरी का पेट्रोल, स्थानीय ग्राहकों को थमाया जाता था मिलावटी तेल
पकड़े गए आरोपियों की पहचान मलिहाबाद (गनार) के अनिल कुमार, काकोरी के अभिषेक राजपूत, उन्नाव के धीरज सिंह और हरदोई के रहने वाले टैंकर ड्राइवर रामतीर्थ के रूप में हुई है।
पूछताछ में टैंकर चालक ने कुबूल किया कि वह मुख्य डिपो से पेट्रोल निकालने के बाद उसे मकान मालिक अनिल कुमार को महज 75 रुपये प्रति लीटर की दर से बेच देता था। मुख्य आरोपी अनिल कुमार ने स्वीकार किया कि वह ऐसे कई टैंकर ड्राइवरों से सांठगांठ रखकर सस्ते दामों पर पेट्रोल-डीजल खरीदता था। इसके बाद वह मुनाफे के लिए उसमें एथेनॉल, सॉल्वेंट और अन्य केमिकल मिलाकर स्थानीय ग्राहकों को बेच देता था। इस पूरे काम में अभिषेक और धीरज भी उसकी मदद करते थे।
नेटवर्क में कई और चेहरों के शामिल होने की आशंका, नमूनों को लैब भेजा गया
आबकारी विभाग के अधिकारी अखिलेश चौधरी ने जानकारी दी कि गिरोह के बैकग्राउंड को खंगाला जा रहा है कि इन्होंने अब तक कितने टैंकरों से तेल चोरी कर मिलावट की है। मौके से जब्त किए गए पेट्रोल और रसायनों के सैंपल लेकर उन्हें जांच के लिए फॉरेंसिक और संबंधित लैब में भेजा जा रहा है।
वाहनों के अचानक बंद होने का खुला राज, जांच के दायरे में कई फ्यूल स्टेशन
इस बड़े नेटवर्क के पकड़े जाने से साफ हो गया है कि बाजार में मिलावटी तेल की सप्लाई किस कदर की जा रही थी। हाल के दिनों में ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं जहां लोगों की गाड़ियां सड़क पर चलते-चलते अचानक बंद हो रही हैं और लोग मैकेनिकों के चक्कर काट रहे हैं। ऑटो एक्सपर्ट्स का भी मानना है कि पेट्रोल में अत्यधिक एथेनॉल या सॉल्वेंट मिलाने से गाड़ियों के इंजन जाम हो जाते हैं। पुलिस अब पकड़े गए आरोपियों से कड़ाई से यह उगलवाने का प्रयास कर रही है कि क्या उन्होंने यह मिलावटी तेल शहर के किसी अधिकृत पेट्रोल पंप पर भी सप्लाई किया है या नहीं।

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