नई दिल्ली: देश के बुनियादी ढांचा क्षेत्र से एक बहुत बड़ी आर्थिक खबर सामने आ रही है। अदाणी पोर्ट्स ने मंगलवार को आधिकारिक तौर पर यह एलान किया है कि उसने दुनिया के दिग्गज एमएससी ग्रुप के साथ एक बड़ा और पक्का समझौता कर लिया है। इस रणनीतिक डील के तहत एमएससी ग्रुप की कंटेनर टर्मिनल संचालन और निवेश से जुड़ी कंपनी 'टर्मिनल इन्वेस्टमेंट लिमिटेड' (टीआईएल), अदाणी विझिंजम पोर्ट प्राइवेट लिमिटेड में बड़ी हिस्सेदारी खरीदने जा रही है। कंपनी इस प्रोजेक्ट में करीब 49 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करने के लिए 1.4 अरब डॉलर का भारी-भरकम निवेश करने वाली है।
भारतीय बंदरगाह इतिहास का सबसे बड़ा विदेशी निजी निवेश
यह नया सौदा न सिर्फ दोनों कंपनियों के लिए बल्कि पूरे देश के लिए बेहद खास है। इसे भारत के बंदरगाह सेक्टर के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा विदेशी निजी निवेश माना जा रहा है। विझिंजम पोर्ट के कुल 2.85 अरब डॉलर के मूल्यांकन के आधार पर टीआईएल इसमें लगभग 1.397 अरब डॉलर का पूंजी निवेश करेगी। इस बड़े वित्तीय कदम से विझिंजम पोर्ट की ताकत कई गुना बढ़ जाएगी और यह हिंद महासागर क्षेत्र में एक बहुत बड़े और प्रमुख ट्रांसशिपमेंट हब के रूप में अपनी धाक जमाने में कामयाब होगा।
विझिंजम पोर्ट ने महज 18 महीनों में रचा नया कीर्तिमान
अदाणी पोर्ट्स (एपीएसईजेड) के पूर्णकालिक निदेशक और सीईओ अश्विनी गुप्ता ने इस उपलब्धि पर गहरी खुशी जाहिर की है। उन्होंने बताया कि विझिंजम पोर्ट ने बेहद कम समय के भीतर अपनी एक अलग पहचान बनाई है। चालू होने के मात्र 18 महीनों के भीतर इस बंदरगाह ने 20 लाख टीईयू कार्गो हैंडलिंग का जादुई आंकड़ा पार कर लिया है, जो देश के किसी भी बंदरगाह के लिए अपने आप में एक अनोखा रिकॉर्ड है। उन्होंने भरोसा जताया कि एमएससी ग्रुप के साथ मिलकर काम करने से वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन बेहद मजबूत होगी और दुनिया के बड़े बाजारों तक भारत की पहुंच और आसान हो जाएगी।
रणनीतिक साझेदारी से मिलेंगे कई चौकाने वाले फायदे
कंपनी के मुताबिक सभी जरूरी सरकारी और नियामकीय मंजूरियां मिलने के बाद इस सौदे को पूरी तरह अमलीजामा पहना दिया जाएगा। इस बड़ी पार्टनरशिप के बाद विझिंजम पोर्ट पर आने वाले माल (कार्गो) की मात्रा में तेजी से बढ़ोतरी होगी और समय से पहले ही इसका विस्तार कार्य पूरा कर लिया जाएगा। सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि बांग्लादेश से आने वाले कार्गो का एक बड़ा हिस्सा अब सीधे भारत आएगा, जो पहले दक्षिण-पूर्व एशिया के दूसरे देशों पर निर्भर रहता था। इसके अलावा पूर्वी अफ्रीका के व्यापारिक समुद्री रास्तों पर भी कंपनी की पकड़ काफी मजबूत होने की उम्मीद है।
जानिए क्या है टीआईएल और विझिंजम पोर्ट की असली ताकत
अगर टर्मिनल इन्वेस्टमेंट लिमिटेड (टीआईएल) की बात करें तो यह पांच महाद्वीपों के 100 से अधिक कंटेनर टर्मिनलों का नेटवर्क संभालने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है। वहीं दिसंबर 2024 में शुरू हुआ विझिंजम पोर्ट भारत का पहला डीप-ड्राफ्ट मेगा ट्रांसशिपमेंट पोर्ट है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह यूरोप, फारस की खाड़ी और सुदूर पूर्व को जोड़ने वाले मुख्य समुद्री व्यापार मार्ग से महज 10 नॉटिकल मील की दूरी पर स्थित है।
साल 2028 तक साढ़े तीन गुना बढ़ जाएगी बंदरगाह की क्षमता
विझिंजम पोर्ट पर इस समय तेजी से विस्तार का काम चल रहा है। अभी इसकी मौजूदा क्षमता 16 लाख टीईयू की है, जिसे दिसंबर 2028 तक साढ़े तीन गुना बढ़ाकर 57 लाख टीईयू करने का लक्ष्य रखा गया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के आंकड़ों को देखें तो इस बंदरगाह ने करीब 13 लाख टीईयू कार्गो और 615 जहाजों का सफल संचालन किया है। अपने काम के पहले ही साल में 10 लाख का आंकड़ा पार करके इसने भारत का सबसे तेज बंदरगाह होने का गौरव भी अपने नाम कर लिया है।

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