इंदौर। आज के इस आधुनिक दौर में जहां शादियां अक्सर अत्यधिक तड़क-भड़क, स्टेटस सिंबल, फिजूलखर्ची और भारी-भरकम बजट का जरिया बनती जा रही हैं, वहीं मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर से एक बेहद अनुकरणीय और प्रेरणादायक मामला सामने आया है। इंदौर के प्रतिष्ठित व्यवसायी और जाने-माने समाजसेवी अक्षय जैन ने समाज को एक नई दिशा देने का बीड़ा उठाया है। उन्होंने अपने सुपुत्र पार्थ जैन के आगामी 12 जुलाई को होने वाले मांगलिक विवाह समारोह को पूरी तरह से सादगी की प्रतिमूर्ति और पर्यावरण संरक्षण को समर्पित एक अनूठा आयोजन बनाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। जैन परिवार ने इस विवाह उत्सव को किसी भव्य तमाशे में बदलने के बजाय बेहद सीमित, आत्मीय और विशुद्ध रूप से पारिवारिक स्वरूप देने का फैसला किया है, जिसमें केवल दोनों पक्षों के बेहद करीबी रिश्तेदार और गिने-चुने परिजन ही साक्षी बनेंगे।
'उपहार या लिफाफा नहीं, नवदंपती के नाम पर लगाएं एक पौधा': परिजनों की भावुक अपील
अक्षय जैन और उनके परिवार ने इस विवाह के निमंत्रण पत्र के साथ अपने तमाम आमंत्रित मेहमानों से एक बेहद मर्मस्पर्शी और विशेष अनुरोध किया है। परिवार ने साफ शब्दों में कहा है कि शादी समारोह में आने वाला कोई भी अतिथि वर-वधू के लिए किसी भी प्रकार का भौतिक उपहार, कीमती सामान, नकद राशि का लिफाफा या कोई अन्य भेंट लेकर बिल्कुल न आए। जैन परिवार के सदस्यों का मानना है कि नए दांपत्य जीवन की शुरुआत करने जा रहे वर-वधू के लिए बड़ों के अंतःकरण से निकला आशीर्वाद, अपनों का सच्चा स्नेह और शुभकामनाएं ही दुनिया का सबसे अनमोल और अमूल्य उपहार हैं।
इसके बदले में परिवार ने मेहमानों के सामने एक अनोखी और पर्यावरण हितैषी शर्त रखी है। उन्होंने अपील की है कि मेहमान नवविवाहित जोड़े को आशीर्वाद देने के स्वरूप अपने-अपने घरों, बाग-बगीचों, आंगनों या अपने आसपास की किसी भी सार्वजनिक जगह पर अनिवार्य रूप से कम से कम एक फलदार या छायादार पौधा अवश्य रोपित करें। केवल पौधा लगाना ही काफी नहीं होगा, बल्कि उस पौधे को एक पेड़ के रूप में विकसित करने और उसकी पूरी जिम्मेदारी के साथ देखरेख करने का दृढ़ संकल्प भी लें। परिवार का दृढ़ विश्वास है कि यदि समाज का हर व्यक्ति अपने घर के हर मांगलिक और शुभ अवसर को सीधे प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण की इस मुहिम से जोड़ ले, तो हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बहुत बड़ा और सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सादगी और मितव्ययता के विचारों से प्रेरित है यह कदम
इस अनूठी और अनुकरणीय पहल के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए समाजसेवी अक्षय जैन ने बताया कि यह क्रांतिकारी निर्णय उन्होंने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा समय-समय पर दिए जाने वाले सादगी, फिजूलखर्ची पर रोक और पर्यावरण बचाने (मिशन लाइफ) के राष्ट्रीय संदेशों से प्रेरित होकर लिया है। वे प्रधानमंत्री के इस विचार से बेहद प्रभावित हैं कि राष्ट्र के विकास और सामाजिक सुधार के लिए नागरिकों को व्यक्तिगत स्तर पर पहल करनी होगी। यही कारण है कि इस शादी में किसी भी तरह का वीआईपी कल्चर, दिखावा या फिजूलखर्ची देखने को नहीं मिलेगी। विवाह की सभी मांगलिक और धार्मिक रस्में जैन धर्म की मूल सांस्कृतिक परंपराओं के अनुसार, अत्यंत पावन माहौल में 'नवकार महामंत्र' के सामूहिक जाप और 'मंगलाचरण' की पवित्र गूंज के बीच संपन्न की जाएंगी।
जैन धर्म के सिद्धांतों का कड़ाई से पालन: रात्रिकालीन भोज पर पूर्ण प्रतिबंध और सात्विक आहार
अक्षय जैन ने आगे बताया कि प्राचीन जैन शास्त्रों और अहिंसा के सिद्धांतों का अक्षरशः पालन करते हुए इस पूरे विवाह महोत्सव में किसी भी प्रकार का रात्रिकालीन कार्यक्रम (नाइट फंक्शन) नहीं रखा गया है। अमूमन देर रात तक चलने वाली शादियों के विपरीत, यहाँ विवाह से जुड़े सभी मांगलिक कार्यक्रम और रस्में सूर्य की रोशनी में यानी दिन के समय ही पूरी कर ली जाएंगी। इसके साथ ही, जैन परंपराओं का सम्मान करते हुए मेहमानों के भोजन के लिए पूर्णतः सात्विक व्यवस्था की गई है, जिसमें जमीन के नीचे उगने वाली कंदमूल चीजों (जैसे प्याज, लहसुन, आलू और जमीकंद) का उपयोग पूरी तरह से वर्जित रहेगा।
दिखावे के इस युग में समाज को नई राह दिखा रहा है जैन परिवार
इंदौर के विभिन्न सामाजिक संगठनों, प्रबुद्ध नागरिकों और जैन समाज के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने इस फैसले की मुक्तकंठ से सराहना की है। सामाजिक चिंतकों का कहना है कि आज के समय में जब लोग अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा दिखाने के लिए शादियों में पानी की तरह पैसा बहाते हैं और टनों भोजन बर्बाद होता है, वैसे दौर में अक्षय जैन के परिवार द्वारा उठाया गया यह कदम पूरे भारतीय समाज की आंखें खोलने वाला है। यह अनूठा विवाह न केवल नई पीढ़ी को हमारी समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं और संस्कारों से जोड़ेगा, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी और ग्लोबल वार्मिंग के इस दौर में पर्यावरण संरक्षण का एक ऐसा कालजयी संदेश देगा, जिसे सदियों तक याद रखा जाएगा।

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