रायपुर : छत्तीसगढ़ में मनरेगा और जल संरक्षण अभियानों के तहत सामुदायिक डबरी निर्माण, नया तालाब, चेकडैम और सोक पिट जैसी संरचनाओं से भूजल स्तर में सुधार हो रहा है। इससे किसान धान के अलावा सब्जी, फल, फूल और मत्स्य पालन जैसी नकदी फसलों से जुड़कर अपनी आय और ग्रामीण आजीविका को नई मजबूती दे रहे हैं।
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में जल संरक्षण, भूजल संवर्धन और ग्रामीण आजीविका को नई मजबूती देने के उद्देश्य से एक महत्वाकांक्षी पहल की शुरुआत की गई है। 'वीबी-जी रामजी योजना' के अंतर्गत जिले में 1.72 करोड़ रुपये की स्वीकृत राशि से 34 सामुदायिक डबरियों का निर्माण कराया जा रहा है। यह पहल न केवल वर्षा जल का संचयन करेगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की आत्मनिर्भरता के लिए एक मजबूत आधार तैयार करेगी।
*जल संरक्षण से संवरेगा गांव का भविष्य*
ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषकर वर्षा पर निर्भर खेती करने वाले किसानों के लिए ये सामुदायिक डबरियां वरदान साबित होंगी। वर्षा जल को एकत्रित कर स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप उपयोग में लाया जाएगा। इससे भूजल स्तर में सुधार होने के साथ-साथ जल प्रबंधन को नई दिशा मिलेगी। सामुदायिक डबरी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि एक ही जल संरचना का लाभ सामूहिक रूप से कई परिवारों को मिलेगा, जिससे ग्रामीणों में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति साझा जिम्मेदारी और सहभागिता की भावना मजबूत होगी।
*कृषि और मत्स्य पालन से बढ़ेंगे कमाई के साधन*
डबरियों में संचित जल का उपयोग केवल सिंचाई और खेती तक सीमित नहीं रहेगा। पर्याप्त जल उपलब्धता और तकनीकी अनुकूलता के आधार पर विभागीय नियमानुसार मत्स्य पालन जैसी आय-वर्धक गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जाएगा। इससे ग्रामीण परिवारों को कृषि के साथ-साथ आजीविका के अतिरिक्त और टिकाऊ अवसर प्राप्त होंगे।
*गुणवत्ता और समयबद्धता पर विशेष जोर*
निर्मित परिसंपत्तियों के दीर्घकालिक लाभ के लिए निर्माण कार्यों में निर्धारित तकनीकी मानकों और गुणवत्ता का सख्त पालन किया जा रहा है। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने बताया कि सामुदायिक डबरी निर्माण जल संरक्षण और ग्रामीण आजीविका संवर्धन की दिशा में एक दूरगामी कदम है। इसका मुख्य उद्देश्य वर्षा जल का अधिकतम संचयन कर स्थानीय जल संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना है। जनपद पंचायतों और मैदानी अमले को कार्यों की नियमित निगरानी तथा उन्हें निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण कराने के निर्देश दिए गए हैं।
*सामुदायिक सहभागिता से टिकाऊ विकास*
योजना का एक प्रमुख पहलू ग्रामीणों को जल के विवेकपूर्ण उपयोग और संरक्षण के प्रति जागरूक करना है। सामुदायिक सहभागिता से इन निर्मित परिसंपत्तियों का उचित रखरखाव संभव होगा, जिससे आने वाली पीढ़ियों को भी इनका दीर्घकालिक लाभ मिलता रहेगा। धमतरी जिले की यह पहल राज्य के अन्य जिलों के लिए भी जल प्रबंधन और ग्रामीण सशक्तिकरण का एक बेहतरीन मॉडल पेश करती है।

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