अमृतसर: भारत और यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन) के बीच लागू हुए ऐतिहासिक व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते के अंतर्गत अमृतसर के श्री गुरु रामदास अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से व्यापार जगत के लिए एक नया अध्याय शुरू हुआ है। इस समझौते के तहत रेडीमेड परिधानों (तैयार कपड़ों) की पहली निर्यात खेप को सीधे ब्रिटेन के लिए रवाना किया गया। यह कदम न केवल दोनों देशों के आपसी व्यापारिक रिश्तों को नई दिशा देगा, बल्कि पंजाब के औद्योगिक परिदृश्य और निर्यात क्षेत्र के विकास में भी एक क्रांतिकारी मोड़ साबित होगा।
ब्रिटेन के बाजारों में भारतीय परिधानों की सीधी पहुंच
इस व्यापार समझौते के प्रभावी होने के बाद यह पहला मौका है जब अमृतसर हवाई अड्डे से रेडीमेड कपड़ों की खेप सीधे ब्रिटिश बाजार के लिए रवाना की गई है। इस सीधी पहुंच से पंजाब के कपड़ा उद्योग और स्थानीय निर्यातकों के लिए अवसरों के नए द्वार खुल गए हैं। समझौते के तहत कई भारतीय उत्पादों को आयात शुल्क में बड़ी राहत मिली है, जिससे अब हमारे घरेलू उत्पाद ब्रिटेन के बाजारों में अन्य देशों के मुकाबले काफी किफायती और प्रतिस्पर्धी साबित होंगे।
लागत और समय की बचत से निर्यातकों को बड़ा फायदा
क्षेत्र के निर्यातकों का मानना है कि अमृतसर हवाई अड्डे से एयर कार्गो के जरिए सीधे माल भेजे जाने से परिवहन में लगने वाला समय और लॉजिस्टिक्स की लागत दोनों में भारी कमी आएगी। इस बड़ी सुविधा का लाभ न केवल पंजाब बल्कि पड़ोसी राज्यों जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के निर्यातकों को भी मिलेगा। अब इन क्षेत्रों के व्यापारियों को अपने पार्सल भेजने के लिए दिल्ली या देश के अन्य बड़े हवाई अड्डों पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं होगी।
अमृतसर कार्गो प्रबंधन की देखरेख में ऐतिहासिक शुरुआत
इस बेहद खास और गौरवपूर्ण अवसर पर अमृतसर कार्गो के स्टेशन प्रभारी आजाद सिंह तथा आयात-निर्यात कार्यकारी ऋषभ विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने पहली खेप की रवानगी की सभी तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुचारू रूप से पूरा कराया। कार्गो विभाग की इस सक्रियता और बेहतर तालमेल से आने वाले समय में हवाई अड्डे से होने वाले निर्यात को और अधिक गति मिलने की पूरी उम्मीद है।
वैश्विक निर्यात हब के रूप में उभरेगा अमृतसर एयरपोर्ट
व्यापारिक विश्लेषकों के अनुसार, यह उपलब्धि अमृतसर हवाई अड्डे को उत्तर भारत के एक प्रमुख कार्गो और निर्यात केंद्र के रूप में स्थापित करने में मील का पत्थर साबित होगी। यह पहल भारत-ब्रिटेन व्यापार को सुदृढ़ करने के साथ-साथ 'मेक इन इंडिया' और 'विकसित भारत' के राष्ट्रीय विजन को भी धरातल पर उतारेगी। भविष्य में परिधानों के अलावा इस मार्ग से कृषि उत्पादों, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों, हस्तशिल्प और अन्य औद्योगिक सामानों के निर्यात में भी बड़ी बढ़ोतरी देखी जाएगी।

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