इंदौर: मध्य प्रदेश के व्यावसायिक शहर इंदौर पुलिस विभाग के भीतर 'पॉकेट गवाहों' के इस्तेमाल को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा खुलासा सामने आया है। महकमे में एक ही जैसे गवाहों के नामों का इस्तेमाल करके सैकड़ों जुए, सट्टे और आर्म्स एक्ट (शस्त्र अधिनियम) के फर्जी मामले दर्ज करने के सनसनीखेज प्रकरण में शहर के 4 थानों के प्रभारियों (TI) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) की ओर से इस मामले में की गई सख्त टिप्पणियों के बाद पुलिस कमिश्नर ने ताबड़तोड़ प्रशासनिक कार्रवाई शुरू कर दी है।
खजराना थाना प्रभारी डिमोट, TI से बने SI
खजराना थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी (TI) दिनेश वर्मा को लगभग 700 जुआ, सट्टा और आर्म्स एक्ट के मुकदमों में 'इरशाद' और 'नवीन' नाम के दो ही एक जैसे गवाह बार-बार सामने आने के मामले में दोषी ठहराया गया है। आंतरिक जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह ने कड़ा कदम उठाते हुए उन्हें इंस्पेक्टर (TI) पद से डिमोट करके सब-इंस्पेक्टर (SI) बना दिया है। हालांकि, यह सजा मिलने के बाद अब वर्मा इस आदेश के खिलाफ वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष अपनी अपील प्रस्तुत करेंगे।
चंदन नगर थाने के TI के खिलाफ 1350 मामलों में सिर्फ 4 गवाह
चंदन नगर थाने के तत्कालीन टीआई इंद्रमणि पटेल की कार्यशैली भी भारी संदेह के घेरे में आई है। उनके कार्यकाल के दौरान दर्ज लगभग 1350 आपराधिक मामलों में अमीन रंगरेज, सलमान, अब्दुल और माजिद नामक केवल चार ही एक जैसे गवाहों के नाम बार-बार उपयोग किए जाने का मामला उजागर हुआ है।
प्रारंभिक चरण में ऐसे 354 मामले अदालत के समक्ष रखे गए थे, जिसके बाद जांच बढ़ने पर करीब 1000 और मामले इससे जुड़ते चले गए। इस गंभीर अनियमितता पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए कड़ी टिप्पणी की, जिसके चलते इंदौर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होना पड़ा था। सुनवाई के दौरान पुलिस की ओर से हलफनामा देकर यह अजीब तर्क दिया गया था कि "कई बार मजबूरन गवाह तैयार करने पड़ते हैं", जिस पर अदालत ने कड़ी आपत्ति जताई। इसके परिणामस्वरूप, टीआई पटेल को थाने की कमान से हटा दिया गया और उनका डीएसपी (DSP) पद पर होने वाला आगामी प्रमोशन भी रोक दिया गया है। हालांकि, अभी उन पर सीधे डिमोशन की कार्रवाई नहीं की गई है।
दो अन्य थानों के प्रभारी भी हुए प्रशासनिक कार्रवाई का शिकार
इस हाई-प्रोफाइल मामले की आंच अन्य अधिकारियों तक भी पहुंची है:
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एमआईजी (MIG) थाना: एमआईजी थाने के पूर्व टीआई अजय वर्मा को एक अलग मामले में जांच के बाद टीआई से डिमोट करके एसआई बना दिया गया है। यह पूरा मामला वर्ष 2022 का है, जब एक युवती द्वारा दी गई शिकायत पर एफआईआर दर्ज न करने की बात सामने आई थी। उच्च न्यायालय (High Court) के आदेश के बाद यह कार्रवाई अमल में लाई गई, और यह प्रकरण अभी भी कोर्ट में विचाराधीन है।
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विजय नगर थाना: विजयनगर थाने के पूर्व टीआई रविन्द्र गुर्जर को भी वर्ष 2024 में नाबालिगों को अवैध सट्टा मामले में कथित तौर पर झूठा फंसाए जाने के आरोपों के बाद डिमोट कर एसआई बनाया गया था। डिमोशन की इस कार्रवाई से नाराज होकर उन्होंने करीब डेढ़ साल तक अपनी ड्यूटी ज्वाइन नहीं की थी, और वर्तमान में यह मामला भी उच्च न्यायालय की डबल बेंच में लंबित है।

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